नौशेरा। वन प्रभाग ने कच्चे माल के रूप में देवदार की सुइयों पर आधारित हस्तशिल्प पर प्रशिक्षण आयोजित किया है। इसका उद्देश्य युवाओं को आजीविका प्रदान करना और जंगल की आग को रोकना है। इसके लिए देवदार की सुई ईंधन के रूप में काम करती है।
नौशेरा वन प्रभाग में हर साल जंगल में आग लगती है, जिससे जंगलों और वन्यजीवों को नुकसान होता है। सुइयों को इकट्ठा करने और संभालने से जंगल की आग को रोकने में मदद मिलेगी और इस तरह बड़ी आपदाओं को रोका जा सकेगा। वन विभाग ने चीड़ की सुइयों से हस्तशिल्प बनाना शुरू किया। ग्रामीण वन समितियों को शामिल करके देवदार की सुइयों का उपयोग करके टोकरियां, ट्रे, टोपियां आदि कई वस्तुएं बनाई गई हैं। प्रारंभ में दो वीएफसी, सिलहारी और ब्रेवी को उक्त आविष्कार के लिए पायलट परियोजनाओं के रूप में चुना गया है। शुरुआती चरण में 10 महिलाओं का स्वयं सहायता समूह बनाया गया है। जो हस्तशिल्प का सामान बना रहा है। नौशेरा स्थित वन विभाग कार्यालय में उनकी देखरेख में पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर वन संरक्षक विवेक वर्मा, डीएफओ नीलिमा शाह, रेंज वन अधिकारी सदीश कुमार, राकेश वर्मा आदि मौजूद रहे।