राजोरी। पहाड़ी जनजाति के कल्याण के लिए सामाजिक सांस्कृतिक संगठन पहाड़ी जनजाति एसटी फोरम ने डाक बंगला कोटरांका में मुद्दों पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यक्रम के दौरान ब्लॉक कोटरांका, बुद्धल व खवास की पंचायत स्तरीय समितियों का गठन किया गया। पहाड़ी जनजाति के प्रमुख सदस्यों ने एक दिवसीय सम्मेलन में भाग लिया और पहाड़ी जातीयता को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग को दोहराई।
कार्यशाला में वक्ताओं ने अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग पर विचार-विमर्श किया। कहा कि दुर्भाग्य से दशकों से उनकी मांग को नजरअंदाज किया जा रहा है। पहाड़ी जनजाति अभी भी अनुसूचित जनजाति का दर्जा पाने के लिए प्रतीक्षा कर रही है। परिसीमन आयोग की ओर से मसौदा जारी होने के बाद जिसमें राजोेरी पुंछ के 8 में से 5 विधायक निर्वाचन क्षेत्रों को अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित किया गया है। उन्होंने कहा कि पहाड़ी कठिन इलाकों में रहते हैं। हर साल मौसमी प्रवास का भी हिस्सा होते हैं। दी जाने वाली सभी शर्तों को पूरा करते हैं। सभी पैनल रिपोर्ट, पिछड़ा आयोग की रिपोर्ट और संवैधानिक संशोधनों से अनुमोदित अनुसूचित जनजाति की हकदार है। वक्ताओं ने हाल के दिनों में भारत सरकार की ओर से दिखाई गई चिंता की सराहना की। जो स्पष्ट रूप से इशारा करता है कि पहाड़ी को अनुसूचित जनजाति का दर्जा पाने का उनका मूल अधिकार मिलने वाला है। इस दौरान बातचीत करते हुए जातीयता के सदस्यों ने एक स्वर में अपनी स्थिति के बारे में चिंता व्यक्त की और भारत सरकार से अनुसूचित जनजाति के दर्जे की उनकी लंबित मांग को प्रस्तुत करने की अपील की।