राजोरी। केरल पुलिस द्वारा फर्जी बंदूक लाइसेंस नेटवर्क का पर्दाफाश करने के बाद अब जिला प्रशासन राजोेरी में या उसके बाहर जांच शुरू करने की तैयारी में है। इस दौरान फर्जी बंदूक लाइसेंस जारी करने के रैकेट चलाने वालों को ट्रैक कर गिरफ्तार किया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार ये गंभीर मामला है और बहुत बड़ी सुरक्षा थ्रेट होने के कारण जिला प्रशासन केंद्रीय जांच एजेंसी को जांच सौंप सकता है। इससे पहले अतिरिक्त डीएम सचिन देव सिंह ने केरल पुलिस द्वारा पहले गिरफ्तार किए गए पांच लोगों के पास से राजोेरी में आधिकारिक रिकॉर्ड में उपलब्ध बंदूक लाइसेंस के किसी भी रिकॉर्ड से इनकार किया था।
वहीं एडीएम राजोरी के अनुसार केरल पुलिस ने एक बार फिर से 18 बंदूकें और इन व्यक्तियों से जब्त लाइसेंस के बारे में विवरण मांगा है। उनमें से कुछ के लिए विवरण रिकॉर्ड जिला प्रशासन के पास रिकॉर्ड में मौजूद नहीं है, जबकि शेष के बारे में जिस अवधि के लिए रिकॉर्ड, विवरण मांगा गया है, उस अवधि का रिकॉर्ड सीबीआई के कब्जे में है, जो पहले से ही एक और फर्जी गन लाइसेंस रैकेट की जांच कर रहा है।
बता दें कि वर्ष 2017 में राजस्थान पुलिस ने एक फ़र्जी गन लाइसेंस रैकेट का भंडाफोड़ किया था, जिसमें खुलासा किया गया था कि जम्मू-कश्मीर में अधिकारियों द्वारा ऐसे लोगों को हथियार रखने वाले लाइसेंस जारी किए हैं, जो आपराधिक रिकॉर्ड वाले हैं। उस मामले की जांच सीबीआई कर रही है।
केरल पुलिस ने मंगलवार को कोच्चि से 13 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिन्हें एक फर्म ने एटीएम के लिए नकदी ले जाने वाले वाहनों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए सुरक्षा गार्ड के रूप में नियुक्त किया था। इससे पहले केरल पुलिस ने पांच लोगों को फ़र्जी गन लाइसेंस के साथ गिरफ्तार किया था।
जिला प्रशासन राजोेरी से निगेटिव रिपोर्ट मिलने के बाद पुलिस ने गोला बारूद के साथ उनकी बंदूकें भी जब्त कर ली हैं।