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डोडा: चिराला स्कूल से आठ शिक्षकों का तबादला, प्राचार्य का पद सात साल से खाली, विद्यार्थी परेशान

Mon, 04 Jul 2022 04:19 PM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल चिराला के आठ शिक्षकों के नाम हैं। इनमें से केवल तीन अन्य शिक्षकों की नियुक्ति की संभावना है। शिक्षकों के स्थानांतरण की जानकारी मिलते ही छात्रों में निराशा का माहौल है।
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सांकेतिक फोटो - फोटो : Social Media
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विस्तार
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डोडा के मुख्य शिक्षा अधिकारी ने वार्षिक स्थानांतरण अभियान के तहत शिक्षकों के स्थानांतरण की एक सूची जारी की है। इस सूची में गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल चिराला के आठ शिक्षकों के नाम हैं। इनमें से केवल तीन अन्य शिक्षकों की नियुक्ति की संभावना है। शिक्षकों के स्थानांतरण की जानकारी मिलते ही छात्रों में निराशा का माहौल है।

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स्कूल में कक्षा छह से 12वीं तक कक्षाएं संचालित हैं। इन्हें पढ़ाने के लिए 19 शिक्षक मौजूद हैं। लेकिन, अब आठ शिक्षकों के स्थानांतरण का समाचार सुनकर छात्रों को अपनी शिक्षा की चिंता होने लगी है। उनका कहना है कि अक्तूबर-नवंबर में परीक्षाएं होनी हैं। फिर भी शिक्षकों के स्थानांतरण का सिलसिला जारी है। 11वीं और 12वीं के छात्रों की पढ़ाई पहले ही प्रभावित थी। लेकिन, स्थानांतरण के चलते नौवीं और 10वीं की पढ़ाई भी प्रभावित होगी।

स्कूल में पांच लेक्चरर तैनात
स्कूल में लेक्चरर स्टाफ के कुल 15 पद हैं। इसमें से पांच लेक्चरर ही स्कूल में तैनात हैं। 12वीं कक्षा के विज्ञान संकाय के छात्र पुरुषोत्तम सिंह और इंशा बानू ने कहा कि स्कूल में सिर्फ रसायन विज्ञान, अंग्रेजी और जंतु विज्ञान की पढ़ाई होती हैं। भौतिक विज्ञान और पर्यावरण विज्ञान के लेक्चरर नहीं हैं। 12वीं की छात्रा सोनिका ने कहा कि वह चिकित्सक बनना चाहती हैं। लेकिन, पूरे विषयों के लेक्चरर नहीं हैं। वहीं, 10वीं की छात्रा स्वयंवर बानू ने कहा कि परीक्षा नजदीक आने के समय शिक्षकों को स्थानांतरित करना अन्याय होगा। पढ़ाई को ध्यान में रखते हुए सीईओ को कार्रवाई करनी चाहिए।
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गणित, कंप्यूटर, आदि के लेक्चरर नहीं
छात्रों ने कहा कि गणित, कंप्यूटर साइंस, वनस्पति विज्ञान, राजनीति विज्ञान, अर्थशास्त्र, शिक्षा शास्त्र, आदि विषय राम भरोसे हैं। इनके लिए जनरल लाइन के शिक्षकों की सहायता ली जा रही है। सभी छात्रों ने जिला स्तर तक बात पहुंचाने की कोशिश की थी, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।

2015 से नहीं स्कूल में प्राचार्य
छात्रों ने कहा कि स्कूल में 2015 से प्रिंसिपल का पद खाली है। इसे भरने के लिए अभी तक कोई पहल नहीं की गई है। काम चलाने के लिए अनुभवी लेक्चरर को कार्यभार सौंपा जाता है।

11वीं और 12वीं में उर्दू-हिंदी की पढ़ाई से वंचित  
स्कूल के 11वीं और 12वीं के छात्र पटवारी, गिरदावर और तहसीलदार नहीं बन पाएंगे। क्योंकि, स्कूल में उर्दू विषय बंद कर दिया गया है।  वहीं, हिंदी के लेक्चरर न होने के कारण स्कूल में हिंदी पढ़ने वालों की संख्या भी कम हुई है। छात्रों का कहना है कि सरकार भाषा को परिपक्व करने पर जोर दे रही है। लेकिन, चिराला के लिए जमीनी हकीकत कुछ और ही है। सरकार से अपील है कि स्कूल से स्टाफ स्थानांतरित न किया जाए। साथ ही जिन विषयों के लेक्चरर नहीं हैं, उन्हें जल्द नियुक्त किया जाए।

क्या कहते हैं अधिकारी
कोई अध्यापक स्थानांतरित नहीं हुआ है। जब तक अन्य शिक्षकों की नई सूची तैयार नहीं होगी, तब तक शिक्षक वहीं सेवाएं देंगे, जहां वह पहले से कार्यरत हैं। दूसरी सूची आने पर शिक्षकों को स्थानांतरित किया जाएगा। जरूरत पढ़ने पर शिक्षकों के तबादले रोके भी जा सकते हैं। छात्रों की पढ़ाई अनिवार्य है, स्थानांतरण नहीं। विभाग को भी छात्रों की पढ़ाई की चिंता है। - बीके सिंह, प्रमुख सचिव, स्कूल शिक्षा विभाग जम्मू-कश्मीर

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