एक ओर राज्य सरकार सरकारी स्कूलों का दर्जा बढ़ाने के साथ साथ गुणात्मक शिक्षा पर बल दे रही है, जिसके लिए स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने पर जोर शोर से काम चलाने के दावे किए जाते हैं लेकिन पिछले लगभग बीस वर्षों से कठुआ से मात्र दो किलोमीटर की दूरी पर चल रहा मोबाइल प्राइमरी स्कूल (एमपीएस) तरफ तजवाल राज्य सरकार और शिक्षा विभाग के सभी दावों की पोल खोलता है।
यूं तो यह मोबाइल प्राइमरी स्कूल है, लेकिन वर्ष 1994 के बाद राज्य भर के तमाम मोबाइल स्कूलों को स्थायी किए जाने के बाद से यह तरफ तजवाल में ही ठहरा हुआ है। दरअसल, राज्य सरकार द्वारा मोबाइल स्कूल गुज्जर और बक्करवाल समुदाय के खानाबदोश लोगों के बच्चों की शिक्षा के लिए खोले गए थे।
वर्ष में दो बार पारंपरिक रूप से पलायन करने वाले इन लोगों के पलायन का सिलसिला तो आज भी जारी है लेकिन आतंकवाद के चरम पर रहने के दौरान इन मोबाइल स्कूलों पर ब्रेक लग गया।