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बहनों ने कैदी भाइयों की कलाइयों पर सजाई राखियां

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पुंछ। रक्षाबंधन पर पहली बार जिला जेल में बंद कैदियों की बहनों ने भाइयों की कलाई पर राखियां सजाईं। जिन कैदियों के परिजन नहीं पहुंच पाए उनको जेल सुपरिंटेंडेंट रजनी सहगल और जेल में तैनात महिला सुरक्षाकर्मियों ने राखियां बांधीं। इस पर्व पर जेल में स्नेहपूर्ण माहौल बन गया,
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जहां हिन्दू, सिख कैदियों के साथ ही मुसलिम कैदियों की कलाइयों पर भी राखियां सजाई हुईं। यह पहला मौका था जब जेल में कैदियों को बहनें राखियां बांधने पहुंची थीं। जेल में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी करवाया गया। इस दौरान कैदियों, बहनों व उनके परिजनों को भोजन भी कराया गया।
कश्मीर से बंद कैदी जावेद सोफी ने कहा कि आज हम बहुत खुश हैं कि हमें बहनों ने राखी बांधी है। उन्होंने भाई-बहन के स्नेह को गीत के माध्यम से दर्शाया।
जेल सुपरिंटेंडेंट रजनी ने कहा कि यह पहला अवसर है जब रक्षाबंधन पर जिला जेल में कार्यक्रम करवाया गया। जब यह कैदी यहां से सजा काटकर जाएंगे तो उन्हें पहले की तरह सम्मान दिया जाए, उन्हें अपनापन दिया जाए, ताकि वे आगे सही रास्ते पर चल सकें।
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सैन्य कर्मियों ने बहनों की सुरक्षा का लिया संकल्प
उधर, नियंत्रण रेखा पर कृष्णा घाटी में तैनात फौजी भाइयों को बहनों ने राखी बांधकर उन्हें घर सा अहसास कराया। महिलाओं व बच्चियों ने सीमा जन कल्याण समिति के सहयोग से कृष्णा घाटी की नंगी टेकरी बटालियन में पहुंचकर फौजी भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी कलाईयों पर राखियां सजाईं और मुंह मीठा कराकर उनकी लंबी उम्र की कामना की। सैन्य कर्मियों ने भी इन बहनों को स्नेह भरा आशीर्वाद दिया और दुश्मनों से उनकी रक्षा करने का संकल्प दोहराया। गढ़ी बटालियन में भी हिंदू, मुसलिम व सिख समुदाय की बहनों ने जवानों को राखी बांधी। पंडित गोपाल शर्मा ने मंत्रोच्चार किया।
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बच्चियों ने फौजी भाइयों
को बांधा स्नेह का धागा
राजोरी। मंडी स्थित सेना के एएलजी ग्राउंड में वीरवार को रक्षाबंधन पर कार्यक्रम करवाया गया। इसमें आर्मी गुडविल पब्लिक स्कूल के बच्चोें ने सैन्य कर्मियों को राखी बांधकर प्रेम व सौहार्द का संदेश दिया। फौजी भाइयों ने बहनों को उपहार भी दिए। मुख्य अतिथि ने कहा कि रक्षाबंधन सामाजिक, पौराणिक, धार्मिक और ऐतिहासिक त्योहार है। रक्षा धागा बांधने की शुरुआत सदियों पहले हो गई थी। इसका जिक्र पुराण में भी मिलता है। इस त्योहार की शुरुआत लगभग 6000 साल पहले बताई जाती है। रक्षाबंधन का इतिहास सिंधु घाटी की सभ्यता से भी जुड़ा है। संवाद
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सुंदरबनी में भी रक्षाबंधन की रही धूम
सुंदरबनी। कस्बे में भी भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक रक्षाबंधन धूमधाम से मनाया गया। वीरवार को रक्षाबंधन का मुहूर्त दस बजे के बाद होने के कारण 11 बजे के बाद ही बहनों नें भाइयों की कलाइयों पर रक्षा की डोरी बांधकर उनकी लंबी आयु की कामना की। वहीं, पंडितों की ओर से वीरवार को भद्राकाल बताने के कारण पर्व का शुभ मुहूर्त नहीं रहने पर कुछ लोग शुक्रवार सुबह सात बजे से पहले रक्षाबंधन मनाएंगे। संवाद
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