पुंछ जिले के देहरागली टाप का आज का दृश्य,चमरेड जंगल और मंगलवार को देहरागली टाप का इृश्य
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पुंछ। सुरनकोट के चमरेड़ के जंगल में आतंकियों द्वारा पांच जवानों को शहीद किए जाने के तीन दिन बीत जाने के बाद भी जवानों के हत्यारे आतंकियों का सफाया न होने और सेना की तरफ से आतंकियों के खिलाफ आपरेशन जारी रखे जाने से ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों में भय का माहौल बन गया है। लोगों को डर सता रहा है कि कहीं जंगल में मौजूद आतंकी आपरेशन से बच निकलने में सफल होकर गांव में घुस आते हैं तो वह ग्रामीणों को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं।
साथ ही आतंकियों के गांव में घुस आने से उनके खिलाफ सुरक्षा बलों को कार्रवाई करने में भी कठिनाइयां पेश आ सकती हैं। मंगलवार शाम करीब पांच बजे तेजी से अपने गांव की तरफ जा रहे तीन चार लोगों से जबबात करनी चाही तो पहले उन्होंने यह कह कर टालने का प्रयास किया कि हमें घर पहुंचने की जल्दी है। हमें उजाले में ही अपने घरों तक पहुंचा है और उसके लिए काफी पैदल चल कर जाना है। हमारे इस इलाके में हालात भी सही नहीं हैं। तीन दिन से जंगल में फौज का आपरेशन चल रहा है। जगह-जगह जवान तैनात हैं। जब उन लोगों से स्थानीय भाषा में बात की गई तो उन्होंने तेजी से आगे बढ़ते हुए कहा कि तीन दिन से हम लोग शाम ढलते ही घरों में बंद हो जाते हैं। माल मवेशियों को एक ही बार शाम को चारा डाल देते हैं। ताकि रात को घर से बाहर न निकलना पड़े। क्योंकि जंगल में मौजूद आतंकी अगर कहीं बच कर हमारे गांव में घुस आते हैं और कोई बाहर मिल जाए उसे नुकसान पहुंचा सकते हैं। अथवा किसी घर को खुला देख कर उसमें शरण ले लेते हैं। तो हमें काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
इन लोगों का कहना है कि वैसे हमें फौज पर पूरा भरोसा है कि वह जंगल में सेना के जवानों को शहीद करने वाले आतंकियों को बच कर नहीं जाने देंगे। जवान तीन दिन से चप्पे-चप्पे पर मौजूद हैं, लेकिन आतंकियों का क्या पता है वह तो मरने के लिए आए हैं। जब इन लोगों से यह पूछने का प्रयास किया गया कि सोमवार सेना के जवानों पर जब हमला हुआ तो उसका आपको कुछ पता है। तो दो लोगों का कहना था कि सोमवार सुबह पांच बजे मौसम काफी खराब था। बारिश के साथ बादल गरज रहे थे। तभी कुछ देर तक गोलियों की आवाजें और कुछ धमाके सुनाई दिए, लेकिन हमें दोपहर को पता चला कि सेना के पांच जवान शहीद हुए हैं। इससे ज्यादा हमें कुछ पता नहीं है। इतना कहते हुए वह ग्रामीण गोली की गति से कच्चे रास्ते पर गांव की तरफ आगे बढ़ गए।