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अनुच्छेद 370 हटने के बाद प्रदेश में बिगड़े हालात: महबूबा

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पुंछ। पीडीपी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने रविवार को दावा किया कि अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद जम्मू-कश्मीर में स्थिति खराब हो गई है। उन्होंने प्रदेश के लोगों से आह्वान किया कि वह अपने अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से लड़ाई लड़ेें। वह रविवार को स्थानीय कृष्ण चन्द्र पार्क में पार्टी के युवा सम्मेलन में आए लोगों को संबोधित कर रही थीं।
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महबूबा ने अनुच्छेद 370 को रद्द करने के केंद्र के फैसले को गलत, असांविधानिक और अलोकतांत्रिक बताते हुए आरोप लगाया कि यह जम्मू-कश्मीर के लोगों की गरिमा और सम्मान के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव कराने की केंद्र की मंशा पर भी संदेह जताते हुए कहा कि भाजपा यहां तब तक चुनाव नहीं कराएगी जब तक कि वह प्रदेश के बहुसंख्यक मुसलमानों को आपस में बांट नहीं देगी। वे तब तक चुनाव नहीं कराएंगे जब तक कि वे 100 प्रतिशत जीत के प्रति आश्वस्त नहीं हो जाएंगे। इन्होंने हिन्दुओं को तो पहले ही अलग कर दिया है। दलितों के साथ यह मारपीट कर रहे हैं और अब आप मुसलमानों को शिया, सुन्नी, कश्मीरी, डोगरों, बक्करवाल और पहाड़ी में बांट रहे हैं। विधानसभा चुनाव को जीतने के लिए भाजपा जम्मू-कश्मीर में कई पार्टियां खड़ी कर रही है। इनकी मदद से वह चुनाव जीतने की जुगत में है।
महबूबा ने आरोप लगाया कि इन्होंने जिस प्रकार संसद में अपने 300 सांसदों की मदद से 370 को हटा दिया अब विधानसभा में भी उसी पर विचार कर रहे हैं।
मुफ्ती ने युवाओं को अनुच्छेद 370 और 35 ए को दोबारा हासिल करने के लिए संघर्ष करने का आह्वान करते हुए कहा कि पांच अगस्त के बाद 370 की लड़ाई समाप्त नहीं हुई है बल्कि लड़ाई शुरू हुई है। हमें पत्थर नहीं उठाने हैं बंदूक नहीं उठानी है बल्कि लोकतांत्रिक तरीके से अपना हक हासिल करना है।
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भाजपा के साथ सरकार बनाने के फैसले का किया बचाव
महबूबा ने अपने पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद के जम्मू-कश्मीर में सरकार बनाने के लिए भाजपा से हाथ मिलाने के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि उनकी एकमात्र इच्छा रक्तपात को समाप्त करना और कश्मीर मुद्दे को हल करना था। कहा, हमने उम्मीद नहीं खोई है और जम्मू-कश्मीर में शांति और विकास के लिए कश्मीर मुद्दे के समाधान के लिए प्रयास करना जारी रखेंगे, हमने गांधी के भारत को स्वीकार किया, न कि उनके हत्यारे गोडसे के भारत को।
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सरकारी बताकर लोगों को जमीन से किया बेदखल
अतिक्रमण विरोधी अभियान का जिक्र करते हुए महबूबा ने कहा कि सरकारी भूमि बताते हुए लोगों को पीढ़ियों से उनके पास मौजूद जमीन से वंचित किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि इस जमीन का इस्तेमाल घाटी में सुरक्षा बलों और जम्मू क्षेत्र में बाहरी लोगों के लिए इमारतों के निर्माण के लिए किया जा रहा है।
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