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केंद्र ने 370 हटाने में असांविधानिक तरीका अपनाया : आजाद

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पुंछ। संविधान कोई धार्मिक ग्रंथ नहीं, जिसमें बदलाव नहीं हो सकता है। संविधान में समय-समय पर बदलाव हुए हैं। अगर देश के संविधान की बात करें तो उसमें करीब सात सौ बार संशोधन कर बदलाव किया गया है। जम्मू-कश्मीर का संविधान भी कई बार बदला है। जैसे यहां प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के पद समाप्त किए गए। इसी प्रकार कई बार बदलाव हुए हैं, लेकिन बदलाव का माध्यम विधान सभा है। हमारा केंद्र सरकार से सिर्फ इसी बात को लेकर मतभेद है कि उन्होंने 370 हटाने में असांविधानिक तरीका अपनाया। क्योंकि 370 को हटाने का सही तरीका यहां की विधान सभा से था।
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यह कहना है जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस गुलाम नबी आजाद का, जो बुधवार को पुंछ नगर स्थित कृष्ण चंद्र पार्क में कांग्रेस पार्टी की एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे। जहां पर उनका स्वागत युवा कांग्रेस नेता एवं डीडीसी सदस्य लोरन रियाज बशीर नाज, पूर्व एमएलसी जहंगीर मीर, ताज मीर और सुरनकोट से कांग्रेस नेता व पूर्व विधायक चौधरी मोहम्मद अकरम ने किया। नेकां और पीडीपी का नाम लिए बिना गुलाम नबी आजाद ने कहा कि कुछ लोग हमें कहते हैं कि हमने 370 के लिए कुछ नहीं किया। अरे तीन साल तक लोकसभा में अकेले हमने ही 370 के लिए लड़ाई लड़ी है। केंद्र सरकार के पास अधिकार था, उसने 370 को हटाया, चाहे उसका तरीका गलत था। सही तरीका तो यह था कि जम्मू-कश्मीर की विधानसभा से इसे हटाया जाता या इसे कम किया जाता। अब 370 का मामला सर्वोच्च न्यायालय में है। इसलिए मैं हर जनसभा में हर जगह इस पर ज्यादा बात नहीं करता हूं और न ही मैं लोगों का मन रखने के लिए झूठ बोलता हूं कि मैं 370 वापस ले आऊंगा। मैं आसमान से तारे तोड़ लाऊंगा, मैं चांद को जमीन पर ले आऊंगा।
मैं सबसे कहता हूं कि हमारे लिए इस समय सबसे अधिक जरूरी है जम्मू-कश्मीर के राज्य का दर्जा बहाल कराना, यहां चुनाव कराना और अपनी जमीन एवं नौकरियों को बचाना है। हम सबको इसके लिए प्रयास करना है। 370 तो केंद्र सरकार देने से रही, न्यायालय में इसका फैसला कब तक होगा। इसका कोई अंदाजा नहीं है। इसलिए हमें केंद्र सरकार पर जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने, चुनाव कराने के लिए दबाव बनाना चाहिए। वैसे भी प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने इन बातों को माना है। अब मैंने एक बात और कही है कि एक तो परिसीमन का काम जल्दी पूरा किया जाए और सर्दी समाप्त होने के बाद चुनाव कराए जाएं। इसके साथ ही मैंने केंद्र सरकार से कहा है कि आप जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने और चुनाव कराने के लिए लोकसभा में बिल लाने जा रहे हैं तो उसी बिल में हमारी जमीनों एवं नौकरियों पर हमारा अधिकार रहे। इसे भी बिल के माध्यम से सुनिश्चित करें, ताकि जम्मू-कश्मीर के लोगों के अधिकार सुरक्षित रहें।
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