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पंचायती राज पर आतंकी साया, पंच दे रहे इस्तीफा

Mon, 19 May 2014 11:37 AM IST
राघवेंद्र नारायण मिश्र/जम्मू
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पंचायतों को व्यापक अधिकार देने वाला कानून अभी लागू भी नहीं पाया है और इस बीच पंचायती राज पर आतंकवाद की प्रेत छाया मंडराने लगी है। प्रदेश सरकार ने दो माह पहले ही कानून में संशोधन कर पंचायतों के व्यापक अधिकार देने की व्यवस्था की थी।
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चुनाव आचार संहिता के कारण यह संशोधित कानून लागू नहीं हो पाया है। इस बीच आतंकी संगठनों ने पंचायत प्रतिनिधियों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। भयभीत पंच-सरपंचों ने इस्तीफे का रास्ता अपनाया है। पंचायत प्रतिनिधि अलगाववादियों की शरण में पहुंच रहे हैं। हुर्रियत कांफ्रेंस ने पंचायत प्रतिनिधियों को इस्तीफे की सलाह दी है।

चुनाव की घोषणा के बाद पंच-सरपंचों पर आतंकी हमले बढ़े। अब तक नौ पंचायत प्रतिनिधियों की हत्या हो चुकी है और दो दर्जन से अधिक घायल हुए हैं। आतंकियों के भय से दो सौ से अधिक पंचायत प्रतिनिधियों ने इस्तीफे दे दिए हैं।
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दक्षिणी कश्मीर के तीन जिलों में 161 प्रधानों, 49 सरपंचों, एक उप सरपंच और काजीगुंड में कांग्रेस के एक ब्लाक प्रेसीडेंट ने इस्तीफा दे दिया है। पंचायत प्रतिनिधियों को पर्याप्त सुरक्षा देने में प्रदेश सरकार विफल रही है। आतंकी संगठनों ने लोकसभा चुनाव में खलल डालने के लिए पंचायत प्रतिनिधियों पर हमले शुरू किए थे। अब अगामी विधानसभा चुनाव से पहले पंच-सरपंचों पर हमले बढ़ने के आसार हैं। रियासत में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया अक्टूबर से शुरू होने वाली है।

गौरतलब है कि हिजबुल मुजाहिदीन, लश्कर ए ताइबा और जैश ए मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों ने पिछले साल फरवरी से पंचायत प्रतिनिधियों को निशाना बनाना शुरू किया था। बाद में आतंकियों ने अपनी रणनीति बदल दी और सुरक्षा बलों पर हमले बढ़े। अब फिर से पंचायत प्रतिनिधियों पर हमले बढ़े हैं। नतीजतन पंच-सरपंचों में खौफ है। आतंकी संगठनों ने पोस्टर लगाकर पंचायत प्रतिनिधियों से इस्तीफे मांगे हैं।

सूबे में 4128 पंचायत
जम्मू कश्मीर के 22 जिलों में 4128 पंचायतें हैं। इन पंचायतों में कुल 33 हजार 485 प्रतिनिधि हैं। कश्मीर संभाग में चुने गए पंचायत प्रतिनिधियों की संख्या 17 हजार 912 है जबकि जम्मू संभाग में यह 15 हजार 628 है। पंचायतों के चुनाव को जम्मू कश्मीर में लोकतंत्र के विस्तार के रूप में देखा गया था। यह आतंकवादियों और अलगवावदियों को करारा तमाचा भी था, चूंकि इसमें 83 प्रतिशत मतदान हुआ। जब पंचायत प्रतिनिधियों ने अधिकारों की मांग में प्रदर्शन शुरू किया तो आतंकवादियों को लोकतंत्र का यह विस्तार रास नहीं आया।
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