पीओके और पाकिस्तान से लगभग चार सौ पूर्व आतंकियों की वापसी को हरी झंडी देने की कवायद शुरू हो गई है। चुनाव आचार संहिता समाप्त होने के बाद जून के पहले सप्ताह में उच्चस्तरीय बैठक प्रस्तावित है जिसमें 382 मामलों को मंजूरी के लिए केंद्र सरकार के पास भेजे जाने को हरी झंडी मिल सकती है।
इन मामलों को संबंधित सुरक्षा एजेंसियों से हरी झंडी मिल चुकी है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की स्वीकृति के बाद पूर्व आतंकी निर्धारित रूट से जम्मू-कश्मीर वापस आ सकेंगे।
गृह मंत्रालय मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के पास ही है। पूर्व आतंकियों की वापसी के लिए उनके रिश्तेदारों की ओर से कुल 1171 आवेदन आए हैं। तीन साल पहले प्रदेश सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय की सहमति से पूर्व आतंकियों के पुनर्वास की नीति को स्वीकृति दी थी।
इसके तहत पीओके और पाकिस्तान से पूर्व आतंकियों की वापसी के लिए पुंछ-रावलकोट, उड़ी -मुजफ्फराबाद, पंजाब का बाघा बार्डर और दिल्ली का इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा को वापसी के लिए अधिकृत रूट घोषित किया गया।
वापस आने वाले आतंकियों के लिए राहत योजनाओं और प्रोत्साहन पैकेज का भी ऐलान हुआ है। गृह विभाग के सूत्रों के मुताबिक प्रदेश में परिवार समेत 352 पूर्व आतंकी कश्मीर आ चुके हैं। लेकिन इनमें से एक भी निर्धारित रूट से वापस नहीं आया।
लिहाजा उन्हें पुनर्वास नीति के तहत घोषित सुविधाएं नहीं दी गई हैं। वापसी के क्रम में बिहार और यूपी की नेपाल सीमा पर एसएसबी द्वारा पकड़े जाने पर इन्हें केंद्रीय गृह मंत्रालय के जम्मू कश्मीर सेल को सौंप दिया जाता है। दिल्ली में गृह मंत्रालय की सूचना के बाद जम्मू कश्मीर पुलिस पूर्व आतंकियों को कश्मीर ले आती है।