सीमा पर लगातार मिल रही सुरंगों को लेकर भारतीय सुरक्षा एजेंसियां सचेत हो गई हैं। पाकिस्तान से लगते बॉर्डर का चप्पा-चप्पा खंगाला जा रहा है। इसी मुहिम के तहत बीएसएफ ने बुधवार को जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले के हीरानगर सेक्टर में अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगती 150 मीटर लंबी सुरंग का पता लगाया है। बीएसएफ का कहना है कि अभी तक इस सुरंग का इस्तेमाल नहीं किया गया है।
पिछले छह माह में बीएसएफ द्वारा खोजी गई यह तीसरी सुरंग है। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, उन लोगों के बारे में पुख्ता जानकारी मिली है, जो पाकिस्तानी सेना, आईएसआई व आतंकी संगठनों के लिए सुरंग खोदने का काम करते हैं। सुरंग खोदने वाली टोली में ‘बॉर्डर एक्शन टीम’ यानी बैट के सदस्य शामिल हैं। बैट को पाकिस्तानी रेंजर्स के साथ लगाया गया है। खास बात है कि बैट को सुरंग खोदने के लिए अतिरिक्त मेहनताना नहीं मिलता है। उन्हें भारतीय सुरक्षा बलों पर गोली चलाने या उन्हें दूसरे तरीके से नुकसान पहुंचाने की एवज में जो कुछ दिया जाता है, उसी के तहत वे सुरंग खोदते हैं। अगर सुरंग खोदते वक्त वे पकड़े जाते हैं या भारतीय सुरक्षा बलों की गोली का निशाना बन जाते हैं तो उनके परिजनों को एक तय राशि दे दी जाती है।
बीएसएफ के जम्मू फ्रंटियर के महानिरीक्षक एनएस जामवाल का कहना था कि हीरानगर सेक्टर के बोबियान गांव में सीमा पार से बनाई गई 150 मीटर लंबी सुरंग का पता लगा है। इसके ठीक दूसरी तरफ पाकिस्तान का शकरगढ़ इलाका है। इसे आतंकवादियों का बड़ा ठिकाना माना जाता है। यहां से आतंकी भारतीय सीमा में प्रवेश करने का प्रयास करते हैं। सुरंग में मिले रेत के बोरों पर मौजूद चिन्ह यह बताने के लिए काफी हैं कि इस सुरंग के निर्माण में पाकिस्तानी संगठनों का बड़ा हाथ रहा है।
सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि पाकिस्तान के लॉन्चिंग पैड से आतंकियों को भारतीय सीमा में प्रवेश करने का मौका नहीं मिल रहा है। घुसपैठ के प्रयास में अनेक आतंकी मारे जा चुके हैं। इसी वजह से अब पाकिस्तानी सेना, रेंजर्स और आईएसआई ने सुरंग खोदने का प्लान तैयार किया है। एक अधिकारी के मुताबिक पाकिस्तान के लॉन्चिंग पैड पर भारी संख्या में आतंकी मौजूद हैं। हर साल पाकिस्तान, खासतौर पर सर्दियों में बर्फबारी का इंतजार करता था। इस तरह के मौसम में घुसपैठ की संभावना बनी रहती है। अबकी बार उसे यह मौका भी नहीं मिल सका, इसलिए वह सुरंग खोदने की तरफ ध्यान दे रहा है। बैट के सदस्यों को इस काम में लगाया गया है। चूंकि ये लोग सेना और रेंजर्स के साथ सीमा पर मौजूद रहते हैं, इसलिए ये सुरंग खोदने के काम में लग जाते हैं।
पहले सुरंग खोदने के लिए एक अलग टीम की मदद ली जाती थी। जम्मू-कश्मीर पुलिस के एक वरिष्ठ अफसर, जिन्हें इंटेलिजेंस का खासा अनुभव है, वे बताते हैं, पाकिस्तानी रेंजर्स ने खर्च घटाने के लिए बैट के सदस्यों को सुरंग खोदने के काम पर लगाया है। अभी तक ये लोग केवल स्नाइपर का काम करते रहे हैं। इनका मकसद होता है कि पाकिस्तान की ओर से जब फायरिंग हो, तो अवसर देखकर वे बीएसएफ या सेना के जवान पर फायर कर देते हैं। रेंजर्स ने देखा कि बैट के सदस्यों को निशाना लगाने में लंबा समय लग जाता है। उन्हें मौका ही नहीं मिल पा रहा है, ऐसे में उन्हें दूसरे काम पर लगा दिया जाए।
पहले उन्हें भारतीय जवान पर स्टीक निशाना लगाने की एवज में 35 से 50 हजार रुपये मिल जाते थे। अगर वे भारतीय सुरक्षा बलों की गोली से मारे जाते, तो उन्हें आठ-दस लाख रुपये दिए जाते थे। उनका शव सम्मान के साथ दफनाया जाता था। उनके गांव कस्बे में उन्हें शहीद कह कर बुलाते थे। अब पिछले कुछ समय से बैट के सदस्य ही सुरंग खोद रहे हैं। आने वाले समय में पाकिस्तान ज्यादा से ज्यादा सुरंग खोदने के प्रयास में है। बीएसएफ के अधिकारी बताते हैं कि अब बॉर्डर के सभी हिस्सों में सुरंग रोधी अभियान शुरू किया गया है। एक इंच जगह को भी बिना जांच-पड़ताल के नहीं छोड़ा जा रहा है। पाकिस्तान की तरफ से सुरंग खोदने का जो भी प्रयास होगा, वह फेल हो जाएगा। सुरंग के जरिये कोई जिंदा आतंकी बाहर नहीं आ सकेगा।