पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने अफजल गुरु मामले में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की चुप्पी पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि राजीव गांधी के हत्यारों की सजा माफी पर राहुल अपनी व्यथा व्यक्त कर रहे हैं लेकिन जब अफजल गुरु को फांसी दी जा रही थी, तब वह चुप थे। महबूबा वीरवार को विधानसभा के बाहर पत्रकारों से बातचीत कर रही थीं।
उन्होंने कहा कि आज राहुल गांधी सभी जगह अपने पापा के हत्यारों को सजा नहीं मिल पाने की बात उठा रहे हैं। यह संवेदनशीलता अफजल गुरु के मामले में नहीं दिखी थी। सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे मामलों को निपटाने की एक प्रक्रिया शुरू की थी लेकिन उसे पूरा होने तक इंतजार नहीं किया गया।
अफजल गुरु का फांसी की सूची में 28वां नम्बर था लेकिन उसे कई लोगों से पहले ही फांसी दे दी गई। यह कार्रवाई रात में की गई। जम्मू कश्मीर के लोगों की भावनाओं का ध्यान नहीं रखा गया।
विधानसभा ने अफजल गुरु का शव सौंपने की मांग करते हुए प्रस्ताव पारित किया गया लेकिन उसे भी नजरअंदाज कर दिया गया। उन्हें लगता है कि देश में दो तरह के कानून चल रहे हैं। एक देश के अन्य हिस्सों के लिए है और दूसरा अलग सिर्फ कश्मीर के लिए।
अफजल गुरु को फांसी भाजपा और कुछ अन्य ताकतों को खुश करने के लिए दी गई। दामिनी मामले में देश की भावना के विपरीत उस छोटी उम्र के आरोपी को कड़ी सजा नहीं दी गई और देश की भावना का हवाला देकर अफजल गुरु को फांसी पर लटका दिया गया।