जिस क्षेत्र में हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हुआ उसकी पहचान हो चुकी है। हालांकि हेलिकॉप्टर के मलबे के अत्यधिक गहराई में फंसे होने और पायलटों की तलाश के लिए उस जगह तक नहीं पहुंचा जा सका है। इसके लिए खास उपकरणों की जरूरत है। सेना के सूत्रों के अनुसार, इन उपकरणों को मंगवाया गया है।
रंजीत सागर बांध में दुर्घटनाग्रस्त होकर गिरे हेलिकॉप्टर के चालक सदस्यों को तलाशने के लिए झील में अभियान दूसरे दिन भी तलाशी अभियान जारी रहा। सुबह नौ बजे के करीब नौसेना के मार्कोस कमांडो (गोताखोरों) ने बुधवार को अभियान शुरू किया। इसके साथ सेना की स्पेशल फोर्सेस ने मोर्चा संभाला। झील के जिस हिस्से में हेलिकॉप्टर गिरा था उस जगह से लेकर आसपास के इलाके में दिनभर गोताखोर डुबकी लगाते रहे। देर शाम तक कुछ भी हाथ नहीं लगा है। उधर, 510 फुट गहरी रंजीत सागर झील की गहराई में उतरने के लिए विशेष उपकरण मंगवाए गए हैं। वीरवार को मार्कोस और भी गहराई में दोनों लापता लोगों की तलाश करेंगे।
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जिस क्षेत्र में हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हुआ उसकी पहचान हो चुकी है। हालांकि हेलिकॉप्टर के मलबे के अत्यधिक गहराई में फंसे होने और पायलटों की तलाश के लिए उस जगह तक नहीं पहुंचा जा सका है। इसके लिए खास उपकरणों की जरूरत है। सेना के सूत्रों के अनुसार, इन उपकरणों को मंगवाया गया है। मार्कोस वीरवार को इन उपकरणों की मदद से फिर तलाशी अभियान लगाएंगे।
सूत्रों अनुसार हेलिकॉप्टर में पायलट और को पायलट (लेफ्टिनेंट कर्नल एएस भट्ट और कैप्टन जयंत जोशी) मौजूद थे। हादसे के कारणों का फिलहाल पता नहीं चल पाया है। उधर, मंगलवार शाम से ही जहां क्षेत्र की घेराबंदी कर दी गई थी वहीं बुधवार को अभियान शुरू किए जाने से पहले ही पुरथू के इलाके में घेराबंदी को और भी बढ़ा दिया गया है।
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घेराबंदी के बीच अधिकारियों और सुरक्षाबलों के अलावा रेस्कयू टीम के सदस्यों को ही क्षेत्र में जाने की अनुमति रही। मालूम हो कि मंगलवार सुबह दस बजकर 45 मिनट के लगभग रंजीत सागर झील पर उड़ान भर रहा सेना का ध्रुव हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त होकर झील के बीचों बीच जा गिरा था। उसने पठानकोट के मामून कैंट से उड़ान भरी थी। हेलिकॉप्टर की बॉडी के कुछ हिस्सों के साथ हेलमेट, जूते और पिट्ठू बैग मंगलवार को बरामद किए गए थे।