गंगा और घाघरा ही नहीं टोंस भी लोगों की नींद उड़ा रही है। नदी में फैला बाढ़ का पानी।
सब ठीक रहा तो आने वाले दिनों में जिले के पहाड़ी और कंडी इलाकों में पानी की समस्या काफी हद तक दूर हो जाएगी। पिछले दो वित्तीय वर्षों में तालाब बनाने और जीर्णोद्धार का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। मनरेगा योजना के तहत बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भी तालाबों के संरक्षण में पूरा सहयोग दिया। इसके पक्के निर्माण से तालाबों को आने वाले कई सालों के लिए सुरक्षित कर लिया गया।
वित्तीय वर्ष 2015-16 और 2016-17 के दौरान ग्रामीण विकास विभाग ने मनरेगा के तहत जहां 182 तालाबों के जीर्णोद्धार के काम शुरू किए, वहीं 132 नए तालाब बनाने का काम भी शुरू करवाया गया। 2651 वर्ग किलोमीटर में फैले 512 गांव और 244 पंचायतों में जल स्थिरता एक चुनौती थी। जिले के उन्नीस ब्लॉक भौगोलिक परिस्थितियों में भी विपरीत हैं। एक ओर जहां पहाड़ी इलाका है तो दूसरी और कंडी। ऐसे में डीसी ने इन इलाकों में कुएं, तालाब और कूहल बनाने और मरम्मत करने पर जोर दिया गया।
ग्रामीण विकास विभाग ने उन इलाकों पर जोर दिया, जहां प्राकृतिक जलस्त्रोत उपलब्ध नहीं थे। ऐसे में उन्नीस ब्लाक में करोड़ाें की लगात से एक बड़ी योजना परवान चढ़ना शुरू हो गई।
उन्नीस ब्लॉक में से गुजरू नगरोटा में सर्वाधिक 18 तालाबों का जीर्णोद्धार किया गया। बिलावर और डुग्गन में दस दस तालाबों जीर्णोद्धार 24.36 लाख की लागत से किया गया।
नए तालाबों को बनाने की प्रक्रिया में बनी ब्लॉक में सबसे अधिक 23 तालाब, बरनोटी ब्लॉक में बीस तालाबों का काम पूरा किया गया। विभाग द्वारा शुरू करवाए गए कामों में 110.064 लाख की राशि तालाबों के जीर्णोद्धार बल्कि 97.783 लाख रुपये नए तालाब बनाने के लिए खर्च किए गए। इससे 270 मोहड़ों की आठ हजार आबादी को वित्तीय वर्ष 2015-16 के दौरान लाभ मिला।