शिवानगर में आयोजित भगवत सप्ताह के दौरान भजनों पर झूमते श्रद्धालु। संवाद
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कठुआ। भगवान परशुराम जयंती समारोह के चलते शहर के ब्राह्मण सभा सभागार में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन जारी है। कथा व्यास पंडित मनोहर लाल शास्त्री ने प्रवचन करते हुए कहा कि सच्चा सुख भौतिक वस्तुओं से नहीं सत्संग से मिलता है। इसलिए सभी को सत्संग जरूर सुनना चाहिए। सत्संग ही व्यक्ति को जीवन मरण के बंधन से छुटकारा दिला सकता है।
कथा के तीसरे दिन शास्त्री जी महाराज ने उपस्थित श्रद्धालुओं को श्री सूत जी और शनकादिक ऋषि को भागवत का उपदेश देते हुए भगवान की कथाओं का प्रसंग सुनाया। उन्होंने श्रीमद्भागवत पुराण में भगवान के 24 अवतारों का विस्तार से वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को बताया कि इस घर धरती पर जब भी धर्म की हानि होती है, तो उसकी स्थापना व अपने भक्तों की रक्षा के लिए भगवान विकराल रूप धारण कर लेते हैं। जैसे भगवान अपने भक्त प्रहलाद की रक्षा के लिए नरसिंह का रूप धारण कर पापी हिरण्यकश्यप का वध किया और भक्त प्रहलाद की रक्षा की। उन्होंने कहा कि भगवान को जानने के लिए हमें भागवत पुराण की कथा को जानना होगा। यह भगवान के स्वरूप का अनुभव कराने वाला और समस्त वेदों का सार है। शास्त्री जी ने कहा कि मनुष्य भौतिक सुखों की प्राप्ति के लिए अपना पूरा जीवन खर्च कर देता है और अंत में वह खाली हाथ इस लोक से चला जाता है। उसे परमधाम की प्राप्ति नहीं हो पाती है। वहीं शहर के शिवानगर में जारी श्रीमद्भागवत कथा के दौरान आदियोगी गौतम महाराज ने भी कथा के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं को भगवत ज्ञान का अमृत पान करवाया। कथा के दौरान भगवत कथा का श्रवण करने के लिए उमड़े भक्तों ने उनके मधुर कंठ ने प्रस्तुत भजनों का आनंद लिया। प्रवचन के दौरान उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण मात्र से हमारे सभी कष्टों को नारायण खुद हर लेते है।