सन्याल में सुरक्षाबलाें की दिन भर रही मूवमेंट। संवाद
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फिर नीले-लाल ट्रैक सूट ने खोली पाकिस्तान की पोल, पहले घुसपैठ करने वाले आतंकियों के पास भी थे ऐसे ही ट्रैक सूट
कठुआ। हीरानगर के सन्याल गांव के पास जंगल में आतंकियों को सुरक्षाबल लगातार तलाश रहे। इस बीच जंगल से बरामद हथियार और अन्य सामान पाकिस्तान की बड़ी साजिश की ओर इशारा कर रहे हैं।
बरामद हुए सामान में नीले और लाल धारियों वाला ट्रैक सूट मिला है। एक नामी कंपनी का डुप्लीकेट यह ट्रैक सूट पूर्व में घुसपैठ कर आए आतंकियों के पास भी मौजूद था। डोडा इनकाउंटर में मारे गए आतंकियों और उनके फोन से सुरक्षाबलों को मिली तस्वीरों में भी इसी तरह के ट्रैक सूट आतंकियों को पहने देखा जा सकता है।
खुफिया सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार डोडा से लेकर किश्तवाड़ और उधमपुर से लेकर कठुआ और भद्रवाह सीमा तक लगातार दहशत फैलाने वाले आतंकियों को जैश-ए-मोहम्मद की ओर से पाकिस्तान में एक ही जगह प्रशिक्षण दिए जाने की बात निकलकर सामने आ रही है। बदनौता में सेना के काफिले पर हमले से लेकर डोडा और जम्मू संभाग में अब तक अन्य जगह हुए हमलों में भी कश्मीर टाइगर्स के आतंकी अपना हाथ होने की बात कुबूलते रहे हैं। यह भी अंदेशा है कि पाकिस्तान में एक ही जगह पर प्रशिक्षण के बाद इन आतंकियों को सामान की सप्लाई देकर भारतीय सीमा में घुसपैठ करवाई जा रही है। भारतीय सीमा के पार पाकिस्तान में अभ्याल डोगरा, बड़ा भाई मसरूर, भीखे चक, सुक्खो चक, टिंबर चक से लेकर सुखमल तक 90 के दशक से आतंकियों के लांचिंग पैड रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक यहां आतंकियों को प्रशिक्षण के बाद कई दिनों तक रिकॉनिसेंस (रैकी) करने के लिए रखा जाता रहा और फिर मौका देखकर पूर्व में घुसपैठ करवाई जाती रही। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र के पार आतंकियों की मौजूदगी को लेकर इनपुट न के बराबर आते रहे हैं। साफ है कि आईएसआई की यह नई चाल है कि जिसमें आतंकियों को भारतीय सीमा के पास उसी समय लाया जा रहा है जब उन्हें घुसपैठ करवानी हो। हैरानी की बात है कि खुफिया एजेंसियों के पास इस बार भी होने वाली घुसपैठ को लेकर इनपुट नहीं थे। सूत्रों के अनुसार आतंकी घुसपैठ से लेकर सुरक्षित जगह तक ओवर ग्राउंड वर्करों की मदद मिलने से पहले जीपीएस का इस्तेमाल कर रहे हो सकते हैं।