प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से बताए गए एआरपी ऑफ गवर्नेंस की परिकल्पना को साकार करने की ओर यह एक और कदम है।
राज्य में पहली बार कठुआ जिले से पुलिस प्रशासन ने ऐसी शुरूआत की है जो क्राइम को कम करने में कारगर सिद्ध होगी। इतना ही नहीं इस शुरूआत से लोगों को पुलिस की सबसे तेज मद्द हासिल होगी।
किसी भी स्थिति में एक बदन दबाने पर पुलिस आपकी मद्द के लिए हाजिर होगी। ये शुरूआत हुई है एफआईआर मोबाइल ऐप की। अब आप समझ रहे होंगे कि यह तो थाने में अपनी फर्स्ट इंफोर्मेशन रिपोर्ट दर्ज करवाने की कोई मोबाइल ऐप होगी। लेकिन ऐसा नहीं है, इस ऐप का नाम है फर्स्ट इमीडिएट रिसपांस यानी सबसे पहले और फौरन मिलने वाला संकेत।
शुक्रवार को जिला पुलिस प्रमुख नीव जैन ने गिरधारी लाल डोगरा मेमोरियल डिग्री कालेज में इस ऐप को लांच किया। ऐप के लांच होते ही कालेज में मौजूद लगभग सभी विद्यार्थियों ने इस ऐप को डाउनलोड किया और इस ऐप को चलाने की जानकारी भी हासिल की।
ऐप के बारे में जानकारी देते हुए नीवा जैन ने बताया कि इस ऐप को एक निजी आईटी कंपनी द्वारा बनाया गया है। इस ऐप के माध्यम से किसी भी व्यक्ति को फौरन पुलिस मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि इस ऐप को इस्तेमाल करने के लिए सबसे पहले ऐप में अपनी पूरी जानकारी भरनी होगी जो ऐप में दर्ज होने के साथ ही पुलिस विभाग के डाटा बेस में भी दर्ज होगी।
ऐसे में व्यक्ति को जब भी पुलिस मदद की जरूरत होगी तो वह इस ऐप के जरिए बने हेल्प बटन को दबाएगा और पुलिस तक उसके द्वारा मांगी गई मदद उसे मिलेगी। उन्होंने कहा कि ऐप को विशेष रूप से महिलाओं और बुजुर्गों के लिए बनाया गया है। ताकि उन्हें किसी भी सूरत और स्थिति में पुलिस मदद से वंचित न रहना पड़ेगा।
गौरतलब है कि इससे पहले भी पुलिस ने अपने रिकार्ड को आनलाइन किया था, जिससे हर मुजरिम की कुंडली एक क्लिक के साथ खुल जाती है। ऐसे में अब पुलिस भी आईटी सेक्टर के विभिन्न लाभ ले रही है। जिससे लोगों को इससे सहायता मिल सकेगी।