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Kathua News: जम्मू-कश्मीर में पहली बार मिला दुर्लभ मैक्वीन बस्टर्ड, वन्यजीव विभाग सतर्क

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बिलावर सेरी मुनी गांव मे मृत मिला दुर्लभ प्रजाति  का पक्षी ।स्रोत जागरूक पाठक।
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सेरी मुनी गांव में सोमवार को दोपहर एक दुर्लभ और संरक्षित प्रजाति के पक्षी का शव मिलने से वन्यजीव विभाग में हलचल मच गई। लोगों की सूचना पर वन्यजीव विभाग की टीम ने पक्षी को कब्जे में ले लिया। पक्षी के एक पंजे में टैग लगा मिला है। पहली नजर में यह पक्षी मैक्वीन बस्टर्ड ( एशियन होउबारा ) प्रजाति का माना जा रहा है।
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विशेषज्ञों के अनुसार यह पक्षी मुख्यतः मध्य एशिया के रेगिस्तानी और स्टेपी क्षेत्रों में पाया जाता है। नवंबर व दिसंबर में यह भारतीय उपमहाद्वीप में प्रवास करता है। जम्मू-कश्मीर में इस प्रजाति का देखा जाना अपने आप में अत्यंत दुर्लभ घटना है, क्योंकि इससे पहले इस क्षेत्र में इसका कोई रिकॉर्ड नहीं रहा है। इसका प्राकृतिक आवास पश्चिम में सिनाई प्रायद्वीप से शुरू होकर ईरान के विस्तृत भूभाग से होते हुए उत्तर की ओर कजाकिस्तान और मंगोलिया तक फैला हुआ है। यह पक्षी विशेष रूप से शुष्क और अर्ध-शुष्क इलाकों में पाया जाता है, जहां यह खुले मैदानों और झाड़ीदार वनस्पति वाले क्षेत्रों में रहना पसंद करता है। इसके प्रवासी व्यवहार के कारण यह सर्दियों में दक्षिण एशिया की ओर भी आता है और इसी प्रवास के दौरान यह भारत के कुछ हिस्सों में भी पूर्व में देखा गया है।
वन्यजीव वार्डन विजय कुमार ने बताया कि जानकारी मिलने के बाद टीम को रवाना किया गया है और पक्षी के शव को कब्जे में लेकर मौत के कारणों की जांच की जाएगी। साथ ही विभाग की टीम इलाके में ऐसे अन्य प्रवासी पक्षियों की मौजूदगी को लेकर रेकी करने की तैयारी में है।
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मैक्वीन बस्टर्ड को आईयूसीएन की रेड लिस्ट में असुरक्षित श्रेणी में रखा गया है। पिछले कुछ दशकों में इसकी आबादी में 20 से 50 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है, जिसका मुख्य कारण शिकार और प्राकृतिक आवास में बदलाव है। भारत में इससे मिलती-जुलती प्रजाति ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के रूप में जानी जाती है जो पहले से ही संकटग्रस्त श्रेणी में है।

1400 मील का सफर तय कर कजाकिस्तान से भारत पहुंचा दुर्लभ होउबारा
पक्षी के एक पंजे में लगे टैग से मिला पता, शेख खलीफा होउबारा ब्रीडिंग सेंटर से की गई थी टैगिंग
कठुआ। बिलावर में सेरी मुनी इलाके में मृत मिला पक्षी होउबारा प्रजाति का है। पक्षी के एक पंजे में लगे टैग से इसका पता चला। इसे कजाकिस्तान के शेख खलीफा होउबारा ब्रीडिंग सेंटर में टैग किया गया था। यह केंद्र ओंगतुस्टिक कजाकिस्तान ओब्लासी क्षेत्र में स्थित है। होउबारा पक्षी ने लगभग 1400 मील (करीब 22 सौ किलोमीटर) का लंबा सफर तय किया।
यह दुर्लभ पक्षी दरियाओं को पार करता हुआ भारत पहुंचा था। कजाकिस्तान का यह केंद्र एशियाई होउबारा बस्टर्ड जैसी संकटग्रस्त प्रजाति के संरक्षण के लिए काम करता है। यह केंद्र कृत्रिम वातावरण में पक्षियों का प्रजनन करता है। इसके बाद उन्हें प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाता है, जिससे जंगली आबादी मज़बूत हो।
यह परियोजना इंटरनेशनल फंड फॉर होउबारा कंजर्वेशन (आईएफएचसी) और रेनेको इंटरनेशनल वाइल्डलाइफ कंसल्टेंट्स के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का हिस्सा है। ऐसे ही केंद्र यूएई, मोरक्को, सऊदी अरब, उज़्बेकिस्तान और कतर में भी हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह केंद्र मध्य एशिया में संरक्षण प्रयासों और वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए महत्वपूर्ण है।
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