बसोहली। धार महानपुर में आयोजित रामलीला में मंगलवार को विभीषण को राज्य से निकाला जाना, कुंभकरण को नींद से जगाना और मेघनाथ ने लक्ष्मण पर शक्ति बाण चलाकर मूर्छित किया। इन दृश्यों का मंचन किया गया।
रावण अपने छोटे भाई विभीषण को पैर की ठोकर मारकर लंका से बाहर निकाल देता है। इस पर विभीषण श्रीराम की शरण में आ जाते हैं। श्रीराम विभीषण से पूछते हैं कि लंका तक पहुंचने के लिए इस विशाल सागर को कैसे पार किया जाए। इसके बाद श्रीराम समुद्र देव से मार्ग मांगते हैं। जब मार्ग नहीं मिलता है तो क्रोध में आकर समुद्र को सुखाने के लिए अग्निबाण संधाते हैं। यह देख सागर देव प्रकट हो जाते हैं और श्रीराम से क्षमा याचना करते हैं। वह श्रीराम को समुद्र के जल पर सेतु बनाने का मार्ग बताते हैं।
लंका पहुंचने पर श्रीराम अंगद को लंका में शांति दूत बनाकर भेजते हैं। वहां रावण के अहंकार को देखकर अंगद ने दरबार में अपना पैर जमाकर चुनौती दे डाली कि यदि मेरा कोई पैर हटा देगा तो श्रीराम की सेना बिना युद्ध किए ही लंका से लौट जाएगी। इसके बाद रावण और श्रीराम की सेना के मध्य युद्ध होता है। रावण अपने भाई कुंभकरण को नींद से जगाने के बाद उसे रणभूमि में भेजता है। जहां कुंभकरण भी वीरगति को प्राप्त होता है। युद्ध में लक्ष्मण का मेघनाथ से सामना होता है। मेघनाथ शक्ति बाण से लक्ष्मण को मूर्छित कर देता है।