रामलीला मंचन के अंतिम दिन राम-रावण युद्ध दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना। युद्ध के दृश्य को दोपहर बाद मंचित किया गया। इस दौरान राम की वानर सेना और रावण की सेना के बीच भीषण युद्ध हुआ। दोनों ओर से बाणों के खूब प्रहार हुए। विभीषण द्वारा राज बताने के बाद राम ने रावण का वध किया। साथ ही लंका पर विजय पताका फहराई।
मंगलवार के दृश्य में राम-रावण युद्ध देखने के लिए आए दर्शकों ने युद्ध क्षेत्र को पास से अनुभव किया। कलाकारों द्वारा युद्ध कौशल और संवादों के साथ भावनाओं को इस तरह से पेश किया गया कि रामलीला मैदान युद्ध क्षेत्र में तबदील नजर आया। दोनों ओर से तीखे बाणों की वर्षा के बीच भगवान राम ने रावण के सिर को धड़ से अलग कर दिया।
अगले ही पल रावण का सिर फिर धड़ पर आ गया और फिर युद्ध शुरू हो गया। राम ने रावण के सिर को नौ बार अलग किया, लेकिन हर बार सिर जुड़ने के साथ युद्ध आरंभ हो जाता। अंत में विभीषण ने रावण को मारने का राज बताया। इसके बाद राम ने एक ही बाण से रावण को मार दिया।
बसोहली में रात साढ़े बारह बजे के आसपास रामलीला मैदान में मौजूद दर्शक हनुमान को संजीवनी बूटी लाते देखने के लिए बेताब थे। सुषेण वैद्य संजीवनी बूटी को पीसकर लक्ष्मण को पिलाते हैं, अगले ही पल लक्ष्मण होश में आ जाते हैं। रामलीला की खास बात यह है कि यहां धर्मनिरपेक्षता की साफ झलक देखी जा सकती है।