पिछले कई सालों से पेयजल समस्या से जूझ रहे गांव खरोट त्रालां के लोगों ने रविवार को पेयजल विभाग के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों ने ट्यूबवेल पर ताला जड़ दिया और विभागीय मशीन को भी अपने कब्जे में ले लिया। लोगों का कहना था कि लंबे समय से पानी की समस्या दूर नहीं की गई ऐसे में जब तक समस्या का समाधान नहीं किया जाएगा वे ट्यूबवेल को नहीं खोलेंगे।
प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे प्रेम सिंह ने कहा कि गांव में पहला ट्यूबवेल 1962 में लगा था। तब लोगों को पानी की सुविधा मिली लेकिन पिछले सात वर्षों से लोगों को पानी के लिए गोविंदसर या फिर विभाग द्वारा भेजे जाने वाले टैंकर पर निर्भर होना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि पहले ट्यूबवेल की पाइपें, पंप और मोटर खराब हो चुकी हैं। ऐसे में विभाग ने नया ट्यूबवेल लगवाया। लेकिन वह केवल 15 दिन पानी देने के बाद खराब हो गया।
उसके बाद आज तक लोगों को ढंग से पानी नहीं मिल पाया है। प्रदर्शनकारियों में शामिल वीना देवी ने कहा कि गांव के लोगों ने विभाग से गुहार लगाई कि ट्यूबवेल को ठीक किया जाए लेकिन विभाग ने कंप्रेसर मशीन भेजने के बाद भी काम नहीं किया।
पिछले तीन महीनों से वह मशीन परिसर में ही खड़ी रही। रविवार को विभागीय कर्मचारी जब मशीन को वापस ले जाने के लिए आए तो लोगों का गुस्सा भड़का और उन्होंने मशीन को अपने कब्जे में लेकर कर्मचारियों को वापस जाने के लिए कह दिया।
इतना ही नहीं लोगों ने ट्यूबवेल के गेट पर ताला जड़ दिया और विभाग के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। लोगों ने विभाग को चेतावनी देते हुए कहा कि वह विभाग की मशीन को तब तक नहीं छोड़ेंगे जब विभाग पेयजल समस्या का समाधान नहीं करता।
उन्होंने कहा कि पिछले सात सालों से लोगों को पेयजल समस्या से दो चार होना पड़ा लेकिन विभाग ने कोई कार्यवाही नहीं की। प्रदर्शनकारियों में नवदीप सिंह, नीरज सिंह, शांति देवी, राकेश कुमार के साथ कई लोग शामिल रहे।