सरकारी व्यवस्था के जंजाल की इसे अनोखी मिसाल ही कहा जा सकता है। कठुआ जिले के बिजली से जुड़े न्यायिक मामलों के निपटाने के लिए अदालत की दूरी रियासत के एक छोर से दूसरे छोर पर तक है।
सुनने में भले ही हैरानी हो, लेकिन कठुआ जिले के बिजली विभाग के मोबाइल मजिस्ट्रेट पुंछ जिले के सूरनकोट में बैठते हैं। यानी बिजली विभाग को यदि चालान पेश करना हो या फिर उपभोक्ता को अदालत में पेश होना हो।
अदालती पेशी के लिए कठुआ से सूरनकोट जाने की मजबूरी है। सड़क मार्ग से यह दूरी कठुआ जिला मुख्यालय से लगभग 300 किलोमीटर है।
यदि बनी के पर्वतीय इलाकों से किसी मामले को मोबाइल मजिस्ट्रेट की अदालत तक पहुंचना हो तो फासला बढ़कर लगभग 500 किलोमीटर तक हो जाता है।
दिलचस्प यह है कि जम्मू और सांबा जिले के लिए मोबाइल मजिस्ट्रेट अदालत की सुविधा जम्मू में है, जबकि कठुआ के मामले सूरनकोट जाते हैं।
बिजली विभाग के एक उच्च पदस्थ अधिकारी ने बताया कि पूर्ववर्ती व्यवस्था में जम्मू संभाग में एक ही सर्किल होता था। लिहाजा राजोरी, पुंछ और कठुआ आपस में जुड़े हुए थे।
लेकिन वर्तमान में उधमपुर, रामबन, डोडा, किश्तवाड़ सहित अन्य इलाकों को बटोत, जम्मू व सटे इलाकों को जम्मू की अदालतों के साथ जोड़ा गया है।
लेकिन कठुआ जिला आज भी अलग-थलग होने के बावजूद सूरनकोट से जुड़ा है, जिसे लेकर सरकार से कई दफा गुहार लगाई जा चुकी है।
मोबाइल मजिस्ट्रेट की अदालत चूंकि अत्यधिक दूरी पर है ऐसे में विभाग अपने डिफाल्टरों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने से भी परहेज करता है।
यदि मामला दर्ज करवाया जाए तो सूरनकोट जाना मजबूरी बन जाता है। ऐसे में विभाग और उपभोक्ता दोनों के लिए मुसीबत बन जाती है।
विभाग के कार्यकारी अभियंता संदीप सेठ ने बताया कि विभाग ने सरकार से सूरनकोट के बजाए कठुआ जिले को जम्मू अदालत से जोड़ने का अनुरोध किया है।