जम्मू संभाग के जिला कठुआ में पशुपालन विभाग की ओर से जम्मू संभाग का सबसे बड़ा चिकन हैचरी यूनिट बनाया जाएगा। पांच करोड़ की लागत से बनने वाले हैचरी यूनिट की खासियत यह होगी कि यहां हैचिंग के साथ-साथ लो-टेक्नीक प्रणाली से चूजों का उत्पादन किया जाएगा, जो जिले में अंडे के साथ-साथ मीट के उत्पादन में भी बढ़ोतरी करेगा और स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करेगा। इसका काम छह महीने में शुरू किए जाने का दावा किया गया है।
अधिकारियों का कहना है कि जम्मू संभाग के सबसे बड़े इस हैचरी यूनिट में हर महीने 30 हजार चूजे तैयार किए जाएंगे। उन्हें कठुआ जिला के साथ-साथ प्रदेश के अन्य हिस्सों में भेजा जाएगा। बता दें कि एलटीपी से तैयार होने वाले चूजे चिकन के साथ-साथ अंडे के उत्पादन में भी बढ़ोतरी करेंगे।
इसके अलावा कठुआ में बनने वाले हैचरी यूनिट को पोल्ट्री क्षेत्र से जुड़े हुए लोगों के लिए ट्रेनिंग यूनिट के रूप में उपयोग किया जाएगा ताकि उन्हें नई और आधुनिक तकनीकों की ट्रेनिंग देकर उनके व्यापार में बढ़ोतरी की जा सके। जानकारी के अनुसार पशुपालन विभाग द्वारा अपग्रेडेशन एंड स्ट्रेंथिंग ऑफ पोल्ट्री हैचरी प्रोग्राम के तहत जिले में नया हैचरी यूनिट स्थापित किया जाएगा, जिसका जिम्मा लोक निर्माण विभाग को सौंपा गया है।
फीड मिल की भी होगी स्थापना
हैचरी यूनिट के साथ-साथ फीड मिल की भी स्थापना की जाएगी, जिसमें नई तकनीक की ऐसी बड़ी मशीनें लगाई जाएंगी, जो एक घंटे में एक टन फीड का उत्पादन करेंगी। इससे जिले के पोल्ट्री कारोबारियों को बाहरी जिलों या राज्यों से फीड नहीं मंगवाना पड़ेगा। वहीं, जिले में बनने वाले हैचरी यूनिट से इलाके में अंडे व मीट की मांग पूरी हो सकेगी। बाहरी राज्यों से मुर्गे मंगवाने की जरूरत नहीं होगी। वहीं, बड़े पैमाने पर स्थानीय लोगों को भी रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।
पुराने कार्यालय में ही स्थापित होगी यूनिट
पशु पालन विभाग कठुआ के मुख्य अधिकारी डॉ. युगल किशोर गुप्ता ने बताया कि विभाग की ओर से पोल्ट्री क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए इस परियोजना को कठुआ में स्थापित किया जा रहा है। इसकी लागत लगभग पांच करोड़ रुपये है और यह यूनिट पशुपालन विभाग के मुख्य कार्यालय परिसर में स्थापित होगी।
डॉ. गुप्ता ने बताया कि हैचरी यूनिट बनने से कठुआ जिले को विशेष लाभ मिलेगा और युवाओं को रोजगार के नए अवसर प्रदान होंगे। इसमें वे बड़े पैमाने पर पोल्ट्री व हैचरी यूनिट स्थापित कर सकेंगे। इसके लिए विभाग अभी भी 50 प्रतिशत सब्सिडी मुहैया करवा रहा है। उन्होंने बताया कि हैचरी के साथ ही फीड मिल भी बनाई जाएगी। इससे परिसर के अंदर ही चूजों के लिए खुराक तैयार की जाएगी।