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सत्तापक्ष ने सराहा परिसीमन आयोग का फैसला, विपक्षी नाखुश

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कठुआ। जम्मू-कश्मीर परिसीमन आयोग की ओर से जारी की गई अंतिम रिपोर्ट का कठुआ में कहीं खुशी को कहीं मायूसी है। सत्तापक्ष से जुड़े लोग इस फैसले को सराहनीय बता रहे हैं तो वहीं विपक्षी दलों के नेता नाखुश हैं। इस फैसले पर जिले के राजनीतिक दलों के नेताओं ने अपनी अलग-अलग प्रतिक्रिया दी है।
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जिले के लोगोें को मिला उनका हक
70 साल में सबसे निष्पक्ष और स्वतंत्र परिसीमन जम्मू-कश्मीर में हुआ है। कठुआ जिले में हर क्षेत्र के लोगों को उनका हक और सही प्रतिनिधित्व मिला है। लोगों और भाजपा की ओर से रखी गई कठुआ नॉर्थ की जगह विधानसभा को जसरोटा नाम दिए जाने की मांग भी पूरी हो गई है, जिसका स्वागत करते हैं। डिंगा अंब का इलाका बिलावर और बसोहली विधानसभा क्षेत्र का एक छोर था। कंडी के इलाकों को अपना प्रतिनिधि चुनने का मौका मिलेगा, जिससे इस इलाके का और बेहतर विकास सुनिश्चित हो सकेगा।
- राजीव जसरोटिया, पूर्व मंत्री
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परिसीमन आयोग की रिपोर्ट जन आकांक्षाओं के अनुरूप
परिसीमन आयोग की रिपोर्ट लोगों की आकांक्षाओं के अनुरूप है। जिले में एक नया विधानसभा क्षेत्र देकर जहां कंडी के क्षेत्र के साथ न्याय किया गया है। वहीं पूर्व में हुई त्रुटियों को सुधारकर बसोहली का भी उद्धार कर दिया गया है।
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प्रेम सागर अजीज, पूर्व मंत्री
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सीमावर्ती इलाकों से सटे लोगों के लिए सही फैसला
हीरानगर विधानसभा क्षेत्र को लंबे अर्से के बाद अनारक्षित किया गया है। बॉर्डर से सटे इस इलाके के लोग इसका स्वागत करते हैं। लेकिन हीरानगर से हटाकर राजपुरा को रामगढ़ के साथ जोड़ा गया है जो अभी भी आरक्षित है। यहां के लोग नहीं चाहते थे कि उनका क्षेत्र आरक्षित हो। वहीं घगवाल को सांबा के साथ जोड़ा गया है। कंडी के लोगों को अपना प्रतिनिधि चुनने का मौका मिला है। जसरोटा विधानसभा क्षेत्र से जिले को विधानसभा में एक और प्रतिनिधि मिलेगा।
सुभाष गुप्ता, पूर्व विधान परिषद सदस्य
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कठुआ सीट पर पंचायतों और गांवों को बांटा गया
लंबे समय से कंडी के लोग सफर कर रहे थे, उनके लिए एक अतिरिक्त सीट बेहतर फैसला है। लेकिन कठुआ विधानसभा अनुसूचित सीट में गांव और पंचायतों का बंटवारा सही नहीं है। वोट बांटा गया है, बरनोटी ब्लॉक के अधिकांश इलाके कंडी में शामिल कर दिए गए हैं। नेशनल हाईवे के नीचे इलाका कंडी में शामिल नहीं किया जाना चाहिए था।
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खुशबू भगत, विस प्रत्याशी कठुआ, अपनी पार्टी
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