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जिला विकास परिषद का स्थायी कार्यालय अधर में लटका

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कठुआ। दो करोड़ 57 लाख की राशि से तैयार होने वाले जिला विकास परिषद के कार्यालय का निर्माण नींव पत्थर रखे जाने के 9 महीने बाद भी शुरू नहीं हो पाया है। बीते साल अक्तूबर महीने की शुरूआत में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने बिलावर से वर्चुअल माध्यम से इस कार्यालय की नींव रखी थी। इसके पीछे फंड्स का अभाव कारण बताया जा रहा है। यही नहीं जिला विकास परिषद के लिए प्रशासन की ओर से वैकल्पिक व्यवस्था के तहत लखनपुर में खोले गए कार्यालय में न तो स्टेशनरी और न ही सफाई व्यवस्था के लिए कोई राशि उपलब्ध है। कार्यालय की छत पर लगाई गई पानी की टंकी में पानी चढ़ाने वाला पंप भी खराब पड़ा है। जिला विकास परिषद अध्यक्ष के अधिकारों और प्रोटोकॉल को लागू करने के बीच प्रशासनिक व्यवस्था भी आड़े आती नजर आ रही है। योजनाओं को बनाने के बाद इन्हें मंजूरी देने का अधिकार तक अध्यक्ष के पास नहीं है। कार्यालय में अस्थायी व्यवस्था के तहत एक क्लर्क और एक अर्दली उपलब्ध है, लेकिन प्रोटोकॉल के अनुसार डीडीसी अध्यक्ष का सीईओ नहीं बनाए जाने से उनका रुतबा प्रशासनिक अधिकारियों के आगे फीका ही नजर आ रहा है। ऐसे में लोग भी बैठकों के दौरान डीसी को ही अपनी समस्या बताकर चले जाते हैं। यह सब तब है जबकि केंद्र और प्रदेश सरकार जम्मू कश्मीर में थ्री टियर पंचायती राज व्यवस्था के दावे कर रही है।
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दरअसल, अक्तूबर महीने में कठुआ के बिलावर में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह पहुंचे थे। यहां उन्होंने जिला विकास परिषद के खरोट में बनने जा रहे कार्यालय की ई आधारशिला भी रखी थी। जिले में जिला विकास परिषद कार्यालय में पंचायती राज से संबंधित जितने कार्यों को अंजाम दिया जा सकता था, वर्तमान में उस कार्यालय तक गिने चुने लोग ही पहुंचते हैं। हालात यह हैं कि आज भी लोग प्रशासनिक अधिकारियों से ही मदद मांगते हैं और उम्मीद भी उन्हीं से करते हैं।
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इमारत का नींव पत्थर बीते साल रखा गया था लेकिन फंड्स के अभाव में काम नहीं हो पाया है। वर्तमान में लखनपुर में प्रशासन द्वारा दी गई इमारत में काम चलाया जा रहा है लेकिन डीडीओ अधिकार न होने के चलते कार्यालय के छोटे मोटे खर्च भी जेब से करने पड़ रहे हैं। सरकार ने प्रोटोकॉल तो दिया लेकिन व्यवस्था नहीं है। जिला विकास उपायुक्त के अधिकार डीसी के पास हैं जो डीडीसी के अधीन नहीं है। ऐसे में जिला विकास परिषद चेयरमैन के पास पूरे अधिकार नहीं है। स्टाफ भी उपलब्ध नहीं है, जिससे अधिकतर काम खुद ही करने पड़ते हैं। उपराज्यपाल और मुख्य सचिव के सामने स्टाफ के तहत पीए, रनर अर्दली, ड्राइवर, सुरक्षा की मांग रखी जा चुकी है। जल्द ही अन्य सभी दिक्कतों को भी रखा जाएगा।
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कर्नल महान सिंह, अध्यक्ष, जिला विकास परिषद, कठुआ
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