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पूरी रात दहशत में रहे सीमावर्ती गांव के लोग

Sat, 01 Oct 2016 01:45 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कठुआ
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border - फोटो : Amar Ujala
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वीरवार की दोपहर भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे गांव को खाली तो करवा दिया, लेकिन सुरक्षित स्थान पर जाने के बाद भी लोगों की नींद उड़ी रही। किसी को चैन नहीं था। देर रात तक लोग एक-एक कर सुरक्षित स्थानों की ओर जाते रहे। सीमावर्ती लोगों ने घर की महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को सबसे पहले सुरक्षित स्थानों की ओर भेजा।
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रात भर मंदिरों, स्कूलों और रिश्तेदारों के यहां शरण लेने वालों में चिंता साफ देखी जा सकती थी। भोर होते ही परिवार के सदस्यों की सांस में सांस आई। इस दौरान जहां सीमावर्ती इलाकों में घर में रुके सदस्य परेशान थे, वहीं घर और गांव छोड़कर शिविर में ठहरे परिवार के सदस्यों की बेचैनी भी चेहरे पर झलक रही थी।

उधर, सीमावर्ती इलाकों में कुछ परिवार ऐसे भी थे जो घर छोड़कर नहीं गए। खासकर बुजुर्गों ने ठान लिया कि अबकी बार युद्ध हो या नहीं घर छोड़कर नहीं जाएंगे। देर रात पलायन कर आए लोगों ने संतोषी माता मंदिर कान्हाचक, हीरानगर हायर सेकेंडरी सहित अन्य स्थानों पर शरण ली।
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परिवार सहित पहुंचे रवींद्र कुमार ने बताया कि साल बीतते हैं, लेकिन सीमावर्ती इलाके के लोगों की किस्मत नहीं। उन्होंने बताया कि छोटे-छोटे बच्चों के साथ कहां जाएं यह समझ नहीं आता। रिश्तेदारों के यहां भी ज्यादा दिन शरण नहीं ले सकते। बच्चों की पढ़ाई चौपट होती है।

मवेशियों की देखभाल के लिए भी परेशान होना पड़ता है। सरकार ने पांच पांच मरले के प्लाट का वादा किया था वो तो पूरा हुआ नहीं, बंकर भी नहीं बने। ऐसे में सीमावर्ती लोगों को पलायन का दंश फिर झेलना पड़ रहा है। वहीं पलायन कर आए लोग सुबह के समय अपने घरों को वापस लौट गए।
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