कठुआ। जिले में 47 सरकारी स्कूल ऐसे हैं जहां प्रति स्कूल विद्यार्थियों की संख्या एक या दो है। इन 47 स्कूलों में पंजीकृत कुल 60 विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए 68 शिक्षक तैनात हैं। यह आंकड़े जिले में सबसे कम इनरोलमेंट वाले स्कूलों के हैं, जिनका जल्द ही नजदीकी स्कूलों के साथ विलय होना तय माना जा रहा है, वहीं सूत्रों का कहना है कि दस से कम बच्चों वाले स्कूलों की संख्या इससे भी कहीं अधिक हैं।
दरअसल, पिछले कुछ वर्षों में रहबर ए तालीम के तहत नियुक्त किए गए शिक्षकों को ग्रेड दो और तीन शिक्षकों का दर्जा देकर नियमित कर दिया गया है। लेकिन इन्हें जिन स्कूलों के खोले जाने के साथ ही नौकरी दी गई थी वहां से कहीं और स्थानांतरित न किए जाने का प्रावधान है। शिक्षा विभाग के लिए यह प्रावधान मुसीबत बना हुआ है। यही वजह है कि कम बच्चे और अधिक शिक्षकों के अनुपात वाले स्कूलों से शिक्षकों को कहीं और तैनात नहीं किया जा रहा है। इसके समाधान के लिए प्रदेश सरकार अब ऐसे कम एनरोलमेंट वाले स्कूलों को नजदीक स्कूलों के साथ विलय करने की तैयारी में है। हालांकि यह प्रक्रिया कुछ वर्ष पहले भी अंजाम दी गई थी लेकिन कठुआ जिले में ही राजनीतिक दबाव के चलते कई स्कूलों का विलय नहीं हो पाया था। उपराज्यपाल के निर्देश के बाद प्रदेशभर में ऐसे स्कूलों को शिक्षा निदेशालय चिह्नित कर रहा है, जहां इनरोलमेंट प्राइमरी स्कूलों में दस विद्यार्थियों से कम है जबकि हाई स्कूलों में 30 से कम विद्यार्थियों वाले स्कूलों की पहचान की जा रही है। इसमें यह भी देखा जा रहा है कि इन स्कूलों में कितने शिक्षक तैनात किए गए हैं।
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उपराज्यपाल की ओर से कम इनरोलमेंट वाले स्कूलों के विलय के निर्देश दिए गए हैं। कितनी कम इनरोलमेंट वाले स्कूलों को विलय किया जाना है, इसका फैसला सरकार को लेना है। संभाग के मुख्य शिक्षा अधिकारियों को ऐसे स्कूलों की सूची तैयार करने को कहा है। विलय के साथ ही जरूरत के अनुसार स्टाफ तैनात होगा। पूर्व में रहबर ए तालीम शिक्षक स्कूल से स्थानांतरित नहीं हो सकते थे। 18 हजार से अधिक आरईटी शिक्षकों को पहले पिछले समय में ग्रेड दो और तीन शिक्षक बनाया गया है। ऐसे में वे एक ही स्कूल में है, इनरोलमेंट कम है, शिक्षक ट्रांसफर नहीं हो पा रहे हैं। जल्द ही इस समस्या का समाधान हो जाएगा।
- रवि शंकर शर्मा
शिक्षा निदेशक जम्मू