अविश्वास प्रस्ताव के बाद सोमवार को प्रस्तावित नगर परिषद कठुआ में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का फ्लोर टेस्ट रद्द कर दिया गया है। जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय के विशेष ट्रिब्यूनल जम्मू की ओर से मामले में अध्यक्ष नरेश शर्मा और उपाध्यक्ष रेखा कुमारी को राहत देते हुए यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश जारी किए गए हैं।
23 जुलाई को जारी यह आदेश सोमवार सुबह नगर परिषद कठुआ में पेश किए गए, जिसके बाद नगर परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी उच्च न्यायालय के विशेष ट्रिब्यूनल के आदेश का हवाला देते हुए विशेष बैठक को रद्द करते हुए याचिकाकर्ता और प्रतिवादियों को यथास्थिति बनाए रखने का सर्कुलर जारी कर दिया है। ऐसे में भाजपा जिला अध्यक्ष और नरेश शर्मा की ओर से सोमवार को भाजपा का ही अध्यक्ष बने रहने का दावा भी पूरा हो गया है और फ्लोर टेस्ट भी नहीं हो पाया।
नगर परिषद कठुआ नरेश शर्मा और उपाध्यक्ष रेखा कुमारी ने जम्मू-कश्मीर विशेष ट्रिब्यूनल के समक्ष याचिका दायर की दी, जिसमें नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी, डीसी कठुआ, निदेशक अर्बन लोकल बाडीज समेत अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले 12 पार्षदों को प्रतिवादी बनाया गया है।
इसमें ट्रिब्यूनल के समक्ष पक्ष रखा गया है कि नगर परिषद कठुआ में याचिकाकर्ताओं के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव में बैठक बुलाने के लिए जम्मू कश्मीर निकाय बाय लॉज 2005 के तहत सही प्रक्रिया नहीं अपनाई गई है। जो कि परिषद के किसी सदस्य की ओर से निकाय के कार्यकारी अधिकारी के समक्ष पेश किया जाना चाहिए। ट्रिब्यूनल की ओर से मामले में अगली सुनवाई चार अगस्त को तय की गई है।
नगर परिषद कार्यालय में जमकर हंगामा
नगर परिषद में सोमवार का दिन राजनीतिक उठापटक वाला रहा। एक ओर अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले पार्षद अध्यक्ष नरेश शर्मा और उपाध्यक्ष रेखा कुमारी को कुर्सी से हटाने के लिए फ्लोर टेस्ट में पहुंचने की तैयारी में थे, वहीं इस बीच कोर्ट के स्टे के साथ नरेश शर्मा और रेखा कुमारी ने अपनी कुर्सी को बचाने में सफल रहे।
दोपहर बारह बजे प्रस्तावित विशेष बैठक का आदेश जारी होने के बाद अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले पार्षदों का गुस्सा भी सातवें आसमान पर दिखा। उन्होंने नगर परिषद कार्यालय में पहुंचकर जहां मुख्य कार्यकारी अधिकारी दिलीप अबरोल से सौंपे गए अविश्वास प्रस्ताव को लेकर सवाल उठाए, वहीं स्टे लाने में उनकी मिलीभगत के आरोप लगाते हुए जमकर नारेबाजी भी की।
पार्षदों ने पूछा कि उन्हें अविश्वास प्रस्ताव सौंपा गया था, ऐसे में स्टे क्यों लाया गया है। इस पर मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने साफ किया कि मामला कोर्ट में विचाराधीन है। ऐसे में कोर्ट को पत्राचार और स्थिति का जवाब देंगे। जवाब से असंतुष्ट पार्षदों ने नगर परिषद कार्यालय में हंगामा करते हुए जमकर नारेबाजी शुरू कर दी। इसके बाद अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले 12 पार्षदों का दल डीसी कठुआ से भी मिलने पहुंचा।
लोकतंत्र की हुई हत्या, झूठ की बुनियाद पर लिया स्टे
अविश्वास प्रस्ताव लाने के बाद भी नरेश शर्मा को कुर्सी से हटाने में नाकामयाब हुए पार्षदों ने सोमवार के वाकये को लोकतंत्र की हत्या बताया है। उन्होंने कहा कि इस षड्यंत्र में मशीनरी का प्रयोग हुआ है। वार्ड दो के पार्षद चौधरी राजिंद्र सिंह बब्बी ने कहा कि 15 दिन बीतने के बाद भी विशेष बैठक नहीं बुलाई गई। आरोप लगाया कि मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने मामले में अपनी मिलीभगत करते हुए अतिरिक्त समय दिया और स्टे करवा दिया गया।