नगर परिषद कठुआ में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की कुर्सी को लेकर चल रहा विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले 12 पार्षदों ने नगर परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को अल्पमत में ला दिया है। इनमें पांच पार्षद भाजपा के हैं।
भारतीय जनता पार्टी की ओर से कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने और अविश्वास प्रस्ताव के चार दिन के भीतर नाम वापस लेने की चेतावनी देने के बाद भी पार्षद अपने फैसले पर अड़े हुए हैं।
अध्यक्ष पर जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करने सहित पारदर्शिता से कार्य न करने और भाजपा के शीर्ष नेताओं के लिए अपशब्द प्रयोग करने के आरोप लगाते हुए बागी पार्षद किसी भी सूरत में वापस आने को तैयार नजर नहीं आ रहे हैं।
शनिवार को दिनभर इंतजार के बाद भी पार्षदों की ओर से जवाब न दिए जाने और अविश्वास प्रस्ताव पर अड़े रहने के बाद जिला भाजपा की ओर से मामला हाई कमान के संज्ञान में ला दिया गया है। दिनभर मामले पर माथा पच्ची भी की गई है। पार्टी सूत्रों के अनुसार हाई कमान की ओर से इन पार्षदों को चेतावनी के बाद कार्रवाई स्वरूप पार्टी में दी गई जिम्मेदारियां वापस ली जा सकती हैं।
उधर, सूत्रों के अनुसार नगर परिषद में बहुमत के जादुई आंकड़े के लिए विपक्ष की मदद भी ली जा सकती है। पार्षदों पर विपक्ष के साथ मिलकर अविश्वास प्रस्ताव लाने के आरोप लगाए गए हैं लेकिन सत्ता के लिए यदि विपक्ष का साथ लिया जाता है तो यह भाजपा के लिए भी किरकिरी होगी।
पार्टी हाई कमान पर स्थिति पर पूरी नजर बनाए हुए है। उधर, नगर परिषद अध्यक्ष नरेश शर्मा ने साफ किया है कि अध्यक्ष के पास दस दिन का समय विशेष बैठक बुलाने के लिए है। समय के भीतर ही बैठक बुला ली जाएगी।