श्रीमद् भागवत कथा का रसपान करने के लिए उमड़े श्रद्धालु। संवाद
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कठुआ। भगवान श्री परशुराम के जन्म उत्सव पर ब्राह्मण सभा की ओर से शहर के वार्ड सात स्थित श्री परशुराम मंदिर परिसर में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन जारी है। शनिवार को कथा व्यास पंडित मनोहर लाल शास्त्री ने प्रवचन किया। इस दौरान उन्होंने शिव-विवाह, ध्रुव चरित्र और वामन अवतार जैसे प्रसंग सुनाते हुए भक्ति रस में सराबोर कर दिया। साथ ही कहा कि प्रभु के भक्ति के बिना आदमी का जीवन निरर्थक है।
कथा व्यास ने कश्यप ऋषि व आदित्य के पुत्र के रूप में जन्म लेकर किस तरह श्री नारायण ने राजा बालि से भिक्षा में तीन पग जमीन मांगी और ढाई पग में ही तीनों लोक को नाप लेने का प्रसंग सुनाया। उन्होंने शिव और सती का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि किस तरह भगवान शिव की आलोचना सुनने पर सती माता ने अपना शरीर यज्ञ कुंड में भस्म कर दिया। जब शिव जी ने सती की देह लेकर भ्रमण किया तो नारायण के चक्र से सती माता का शरीर 51 अलग-अलग स्थानों पर इस धरती पर पड़े। जहां शक्ति पीठों की उत्पत्ति हुई। उन्होंने श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि जीवात्मा का सच्चा संबंध सगे संबंधियों से नहीं, बल्कि प्रभु से होना चाहिए। वह जीवन निरर्थक है जो मनुष्य जन्म में भी प्रभु की भक्ति न करें। उन्होंने कहा कि शिव विश्वास और माता पार्वती श्रद्धा हैं, हमें इनका सुमिरन करते रहना चाहिए। अंत में आरती के साथ कथा को विश्राम दिया गया।