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नेताओं ने दल बदले मतदाता असमंजस में

Wed, 12 Nov 2014 09:50 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कठुआ
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धुर विरोधियों के बीच चुनावी संग्राम के मामले में जिले की बसोहली विधानसभा सीट का चुनाव सबसे दिलचस्प रहा है। इस बार भी मुकाबले कम दिलचस्प नहीं है। चुनाव को लेकर उभरे नए समीकरण में नेताओं ने सियासी दलों की अदला बदली कर ली है।ऐसे में नेताओं और पार्टियों को लेकर उपजा विरोधाभास मतदाताओं को पसोपेश में डाल रहा है।
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ऐतिहासिक कला नगरी बसोहली की सियासत ने दरअसल हाल के दिनों में अजब करवट ले ली है। बसोहली से वर्ष 1996 से कांग्रेस के टिकट से चुनाव लड़कर लगातार दो दफा जीत दर्ज करने वाले लाल सिंह ने संसदीय चुनाव जीतने के बाद अपनी पत्नी कांता चौधरी को भी कांग्रेस की टिकट से चुनाव जिताने में सफलता हासिल की।

इस लिहाज से लाल सिंह खेमे ने कांग्रेस के झंडे तले बसोहली की सियासत में करीब ढाई दशक तक पकड़ बनाए रखी। बीते विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट से चुनाव लड़कर जगदीश राज सपोलिया ने आखिरकार जीत दर्ज कर ली।
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ऐसे में बसोहली में कांग्रेस बनाम भाजपा के बीच रस्साकशी का दौर जारी रहा। इस चुनाव में मामला तब उलट हो गया जब संसदीय चुनावों में टिकट न दिए जाने पर पूर्व सांसद लाल सिंह ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया।

भाजपा ने लाल सिंह को बसोहली विधानसभा सीट के लिए प्रत्याशी भी घोषित कर दिया। दल बदलने के इस पैंतरे का जवाब बसोहली के वर्तमान विधायक ने भाजपा छोड़ कांग्रेस में शामिल होकर दिया।

विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर दोनों ही नेताओं ने चुनाव प्रचार अभियान को तेज कर दिया है। कार्यकर्ताओं और समर्थकों के साथ धुंआंधार बैठकों का दौर जारी है।

नेताओं के व्यक्तिगत समर्थकों को छोड़ दें तो पार्टी के लिए वोट करने वाले असमंजस में पड़ गए हैं। देखने वाली बात होगी कि नेताओं द्वारा दल बदलने के पैंतरा को जनता किस तरह लेती है।

उल्लेखनीय है कि पिछले चुनावों में बसोहली चुनाव का मुकाबला त्रिकोणीय रहा था जिसमें भाजपा के बाद नेशनल कांफ्रेंस प्रत्याशी दूसरे और कांग्रेस प्रत्याशी को तीसरा स्थान मिला था।
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