भारत पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर तनावपूर्ण हालात में जीने को मजबूर बाशिंदों के लिए प्रशासन से ‘मिशन हिफाजत’ और जम्हूरियत पर काम तेज कर दिया है।
अंतर्राष्ट्रीय सीमा की जीरो लाइन से पांच किलोमीटर के दायरे में आने वाले गांवों में चुनावी ड्यूटी पर तैनात अमला हर वोटर को प्रेरित करने में जुटा है। मिशन के तहत बाकायदा लक्ष्य निर्धारित किया गया है कि वोटरों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हिस्सा लेने को प्रेरित किया जाए।
भारत पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर दरअसल पिछले दिनों हालात बेहद तनावपूर्ण उभर आए थे। करीब 12 हजार लोगों को पलायन कर सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट होना पड़ा था।
तीन सप्ताह तक हजारों ग्रामीणों ने विस्थापित शिविरों में गुजर बसर की। प्रशासन ने विस्थापित ग्रामीणों की देखरेख और घर वापसी के अभियान को ‘मिशन हिफाजत’ नाम दिया। इसी बीच विधानसभा चुनाव का शेड्यूल जारी हो गया।
जिला प्रशासन ने ‘मिशन हिफाजत’ के साथ मिशन जम्हूरियत को जोड़कर विशेष रणनीति के तहत अभियान छेड़ दिया है। जीरो लाइन से पांच किलोमीटर के दायरे में आने वाले 57 गांव हैं।
इन गांवों में मतदाताओं की कुल संख्या 25 हजार है। बाकायदा प्रशासनिक अमले को इन पच्चीस हजार मतदाताओं तक पहुंचने और मतदान को प्रेरित करने का लक्ष्य दिया गया है।
कठुआ जिले में इस दफा निर्वाचन आयोग ने नब्बे फीसदी मतदान का लक्ष्य निर्धारित किया है लेकिन भारत पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर इस लक्ष्य को शत प्रतिशत पहुंचाने के प्रयास जारी हैं।
जिला चुनाव अधिकारी डा. शाहिद इकबाल चौधरी के अनुसार भारत पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय सीमा से सटे 57 गांवों के लिए विशेष अभियान चलाया गया है।
सुरक्षित स्थानों पर मतदान केंद्र स्थापित करने हों या फिर मतदाताओं तक महत्वपूर्ण जानकारी और प्रेरक संदेश। प्रशासन कोई भी कसर नहीं छोड़ना चाहता है।