बसोहली की ऐतिहासिक रामलीला में रविवार को ऋषि-मुनियों के लिए आतंक का पर्याय बन चुके राक्षसों खर-दूषण का प्रभु श्रीराम के हाथों अंत का मंचन किया गया। सीता मैया के जन्म पर दर्शकों ने जयघोष किया।
रामलीला के तीसरे दिन राजा दशरथ के दरबार में गुरु विश्वामित्र ऋषियों-मुनियों की राक्षसों से रक्षा के लिए राम-लक्ष्मण को अपने साथ ले जाने आते हैं। यह दृश्य बहुत मार्मिक था।
राजा दशरथ के लिए अपने पुत्रों से अलग होना हर किसी के दिल को छू गया। जंगल में जाकर राम-लक्ष्मण राक्षसों का संहार करके ऋषि मुनियों की उनसे रक्षा करते हैं।
प्रभु श्रीराम के हाथों खर-दूषण के अंत पर दर्शकों ने जयघोष किया। दूसरे दृश्य में गुरु की सलाह पर अपने राज्य को सूखे से निजात दिलाने के लिए राजा जनक हल चलाते हैं। हल चलते-चलते एक जगह किसी चीज में अटक जाता है। हल रोककर जब राजा जनक देखते हैं, तो उन्हें सीता के रूप में एक कन्या मिलती है।