जिले की हजारों महिलाएं अब अपने जीवन की दिशा बदल रही हैं
कठुआ। जिले की हजारों महिलाएं अब अपने जीवन की दिशा बदल रही हैं वह भी उस मोड़ पर जहां कभी औपचारिक शिक्षा का सपना अधूरा रह गया था। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद की ओर से चलाया जा रहा उल्लास कार्यक्रम इन महिलाओं के लिए सिर्फ एक शैक्षिक पहल नहीं बल्कि आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता की ओर पहला कदम बन गया है।
वर्ष 2022-23 में जिले में एक सर्वेक्षण किया गया जिसमें 49,221 प्रौढ़ों को पूरी तरह अशिक्षित पाया गया। इनमें से 31,225 महिलाएं थीं जिन्होंने कभी स्कूल का दरवाजा नहीं देखा लेकिन अब सीखने की ललक उनके भीतर जाग चुकी थी। इन महिलाओं को उनके घर के पास ही स्वयंसेवकों की मदद से अक्षर ज्ञान और व्यावहारिक शिक्षा दी गई। छह महीने के पाठ्यक्रम के बाद परीक्षा आयोजित की गई। इसमें पास होने वाली महिलाओं को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। यह प्रमाण पत्र उनके लिए सिर्फ एक कागज नहीं बल्कि उनके आत्मविश्वास की पहली जीत थी।
जानकारी के अनुसार पहले चरण में 4847 महिलाओं ने हिस्सा लिया। दूसरे चरण में यह संख्या बढ़कर 6521 हो गई। तीसरे चरण में तो 5923 महिलाएं परीक्षा में शामिल हुईं जो यह दर्शाता है कि शिक्षा के प्रति महिलाओं की रुचि लगातार बढ़ रही है।
अब हम पढ़ेंगे, बढ़ेंगे और समाज को बदलेंगे
उम्र नहीं, जज्बा मायने रखता है। 70 वर्षीय तृषला देवी कंडी के एक छोटे से गांव से ताल्लुक रखती हैं। कभी स्कूल का नाम तक नहीं जानती थीं। बचपन में घर की जिम्मेदारियों और फिर विवाह के बाद जीवन की दौड़ में शिक्षा उनके लिए सपना बनकर रह गई थी। लेकिन जब गांव में ‘उल्लास’ कार्यक्रम की शुरुआत हुई, तो उन्होंने ठान लिया अब नहीं रुकना है।
तृषला देवी ने न केवल नियमित रूप से कक्षाएं लगाई, बल्कि हर दिन अभ्यास कर खुद को साबित किया। शुरुआत में उन्हें अक्षर पहचानने में कठिनाई हुई लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। आज वे न केवल अपना नाम लिख सकती हैं, बल्कि मोबाइल भी चला लेती हैं जो उनके लिए एक सपना था। तृषला देवी की तरह की कई महिलाएं अब खुद लिखती और समझती हैं। वे अब सिर्फ घर की चारदीवारी तक सीमित नहीं, बल्कि समाज में बदलाव की वाहक बन रही हैं।
जिले में प्रोढ़ों को शिक्षित बनाने के लिए शुरू हुए कार्यक्रम के शुरुआती चरण में महिलाओं में इसको लेकर जागृति नहीं देखी गई थी लेकिन लगातार किए जाने वाले प्रयास चलते उन्हें शिक्षा का महत्व समझ में आने लगा है। मौजूदा समय में जिला में 7549 पुरुष और 13934 महिलाएं ऐसी बची हुई है जिन्हें इस कार्यक्रम से जोड़कर अक्षर ज्ञान करवाया जाएगा। उम्मीद है कि इस लक्ष्य को जल्द प्राप्त कर लिया जाएगा।
- राजीव शर्मा, जिला नोडल अधिकारी, उल्लास