अद्यैत स्वरूप आश्रम में सत्संग के दौरान भक्तिभाव से झूमते भक्त। संवाद
- फोटो : KATHUA
कठुआ। शहर के वार्ड 19 स्थित शिवानगर के श्री अद्वैत स्वरूप आश्रम में 33वें भक्ति ज्ञान सम्मेलन सोमवार को संपन्न हो गया। आश्रम प्रांगण में आयोजित सम्मेलन के अंतिम दिन सुबह संतों ने ध्वजारोहण कार्यक्रम का आयोजन किया। इसके बाद आश्रम में संत सम्मेलन आयोजित किया गया। संत सम्मेलन में संत ज्योत्सना बाई जी ने प्रवचन करते हुए कहा कि मनुष्य के जीवन में गुरु का स्थान बहुत ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इस संसार में अगर दिन है तो रात भी है। धर्म है तो अधर्म भी, पाप है तो पुण्य भी, हमें इन सभी में किसे अपनाना है और किसका त्याग करना है, इसका ज्ञान गुरु से मिलता है।
गुरु से मिले ज्ञानरूपी प्रकाश से हम अपने कर्म को सद्गति की ओर ले जाने वाला बना सकते है, इसलिए हमें अपने गुरु के ज्ञान को धारण करना चाहिए और सदा सत्संग को अपने जीवन का कर्म बनाना चाहिए, इसी में हमारा कल्याण है। सम्मेलन के अंत में विशाल भंडारे का आयोजन हुआ, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। इस भक्ति ज्ञान सम्मेलन में मौजूद महात्मा अनुराग शरणानंद ने भी अपने भाव प्रगट किए। दोपहर बाद आश्रम में आयोजित भंडारे में सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु शामिल होकर प्रसाद ग्रहण किया।