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जाटों ने उठाई ओबीसी का दर्जा दिए जाने की मांग

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जाटों को ओबीसी का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर नारेबाजी करते जाट महासभा के सदस्य। संवाद - फोटो : KATHUA
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कठुआ। जम्मू कश्मीर में जाट समुदाय के लोगों ने ओबीसी का दर्जा दिए जाने की मांग की है। रविवार को अखिल भारतीय जाट महासभा के तहसील अध्यक्ष सतपाल चौधरी की अध्यक्षता में बैठक का आयोजन किया गया। जिसमें वक्ताओं ने आर्थिक और सामाजिक तौर पर पिछड़े जाटों के उत्थान के लिए उन्हें ओबीसी का दर्जा देने की मांग की गई। वहीं बैठक के उपरांत सभा के सदस्यों ने अपनी इस मांग को लेकर जोरदार नारेबाजी की।
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इस मौके पर सतपाल चौधरी ने कहा कि पहले अनुच्छेद 370 को जाट समुदाय को ओबीसी का दर्जा देने में बाधा बताया जाता था। लेकिन अब अनुच्छेद 370 और 35ए हटा दिया गया है। जम्मू कश्मीर की सरकार भी केंद्र सरकार के हाथ में है। लिहाजा जाटों की दशकों पुरानी मांग को जल्द पूरा किया जाए।। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ओबीसी का दर्जा प्रदान करने में विफल रहती है तो जाट समुदाय आंदोलन का सहारा लेने के लिए मजबूर होंगे। चौधरी ने कहा कि खेती और पशुपालन जैसे पेशे से गुजारा करने वाले जाट पिछले 50 वर्ष से अधिक समय से विभिन्न सरकारों से उन्हें ओबीसी का दर्जा दिए जाने की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन उनकी सुध नही ली जा रही है। इससे समुदाय के लोगों में रोष बढ़ता जा रहा है। इस मौके पर प्रकाश चंद ने कहा कि देश के विभिन्न राज्यों में रहने वाले जाटों को ओबीसी का दर्जा देकर उन्हें आरक्षण का लाभ दिया जा रहा है, लेकिन जम्मू कश्मीर में रहने वाले करीब सात लाख जाट परिवारों में 90 प्रतिशत से ज्यादा लोग आज भी काफी पिछड़े हैं। सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े जाट समुदाय के लोगों का उत्थान तभी संभव है जब सरकार जाटों को ओबीसी का दर्जा दे। इस मौके पर लेखराज, अजय कुमार, जगदीश राज, विनय कुमार, राकेश चहल, मुकेश कुमार ढिल्लन, अक्षय चौधरी, अमित कुमार, आर्यन चौधरी आदि उपस्थित रहे।
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