कठुआ। जम्मू कश्मीर में शिक्षा क्षेत्र को सुदृढ़ करने के लिए दूर दराज और ग्रामीण क्षेत्रों में केंद्रीय विद्यालय खोले जाने की तैयारी है, जिसके लिए डीपीआर बनाने की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है। ऐसे में उम्मीद है कि जल्द सरकार की ओर से प्रदेश को 11 नए केंद्रीय विद्यालयों का तोहफा मिल सकता है। केंद्रीय विद्यालय संगठन की ओर से प्रदेश के 11 केंद्रीय विद्यालय की मंजूरी के लिए भेजे जा चुके हैं। इनमें से अधिकतर संभाग के विभिन्न जिलों के दूर दराज इलाकों में हैं। कठुआ जिले के दूर दराज बनी और रामकोट के अलावा गूल रामबन, रत्नीपोरा पुलवामा, कटड़ा के ककरियाल, द्रुगमुला कुपवाड़ा, गूलपुर पुंछ, कंगा वैली रामबन, रियासी, गालंधर पुलवामा और मुगल मैदान किश्तवाड़ में प्रस्तावित केंद्रीय विद्यालयों में यह कवायद पूरी कर ली गई है। नौ मई तक केंद्रीय विद्यालय के लायजनिंग अधिकारियों के सहयोग से सीपीडब्ल्यूडी की टीमों ने इन प्रस्तावित केंद्रीय विद्यालयों का दौरा कर ब्यौरा एकत्रित कर लिया है। कोरोना महामारी के चलते डेढ़ साल तक रुकी रही इस प्रक्रिया ने अब रफ्तार पकड़ ली है। दरअसल, केंद्रीय विद्यालय मुख्यालय की ओर से इन प्रस्तावित केंद्रीय विद्यालयों के लिए सीपीडब्ल्यूडी जम्मू-कश्मीर को स्ट्रक्चरल ड्राइंग, मिट्टी की जांच रिपोर्ट, स्थलाकृतिक सर्वेक्षण, लेआउट ड्राइंग आदि के आधार पर डीपीआर तैयार करने को कहा गया है, जिसके बाद बाकायदा केंद्रीय विद्यालय क्षेत्रीय कार्यालय की ओर से लाइजन अधिकारी भी टीमों के साथ नियुक्त किए गए। दूर दराज के इलाकों तक नौ मई को इस प्रक्रिया को पूरा कर लिया गया है।
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बनी और रामकोट में फरवरी 2020 में पूरा हुआ था सर्वे
बनी और रामकोट में प्रस्तावित केंद्रीय विद्यालयों को लेकर केवी संगठन की टीम फरवरी 2020 में ही सर्वे कर इसे उपयुक्त बता चुकी है, जिसके बाद शिक्षा निदेशालय ने जिला प्रशासन को चिह्नित भूमि केवी संगठन को सौंपने को कहा था। जिला प्रशासन कठुआ की ओर से बनी में चिह्नित बीस कनाल और रामकोट में चिह्नित तीस कनाल भूमि केंद्रीय विद्यालय संगठन को हस्तांतरित की गई है। इसके साथ ही जिला प्रशासन ने केंद्रीय विद्यालय संगठन की मांग पर हलफनामा भी दाखिल कर दिया है, जिसमें चिह्नित भूमि तक सड़क तैयार करने की जिम्मेदारी प्रशासन ने ली है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के सचिव की ओर से संबंधित मामलों में प्रदेशों और राज्यों के मुख्य सचिवों को भी निर्देश दिए जा चुके हैं। हाल में चैलेंज मैथड कमेटी की एक उच्च स्तरीय बैठक में भी मामले को गंभीरता से लिया था।
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जिले में विंटर जोन का पहला सीबीएसई स्कूल बनेगा बनी केवी
मंजूरी के बाद बनी का केवी विंटर जोन का पहला सीबीएसई स्कूल होगा। अभी तक सीबीएसई स्कूल उपलब्ध न होने से बनी सब डिवीजन के विद्यार्थियों को बसोहली के एकमात्र जवाहर नवोदय विद्यालय में दाखिला लेना पड़ता था। बनी कस्बे से मात्र एक किलोमीटर की दूरी पर केंद्रीय विद्यालय की इमारत बनाने के लिए राजस्व विभाग की ओर से बीस कनाल भूमि चिह्नित की गई है, वहीं वैकल्पिक व्यवस्था के तहत इस केवी की कक्षाओं को गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल बनी में चलाए जाने पर सहमति बनी थी।
उधर, रामकोट में भी प्रशासन की ओर से चिह्नित भूमि और वैकल्पिक व्यवस्था के तहत चिह्नित इमारत को संगठन की टीम ने प्राथमिक सर्वे में उपयुक्त पाया है। पहाड़ी इलाके के विद्यार्थियों के लिए यह शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ा वरदान इसलिए भी होगा क्योंकि इन इलाकों में अब तक सीबीएसई स्कूल नहीं हैं। पहाड़ी इलाके के लगभग डेढ़ सौ किलोमीटर के दायरे में दो नए केंद्रीय विद्यालय खासतौर पर इलाके की बेटियों के लिए बड़ी सौगात हैं।
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कोट
प्रदेश में विभिन्न जिला प्रशासनों की ओर से प्रस्तावित केंद्रीय विद्यालयों के लिए सीपीडब्ल्यूडी की ओर से डीपीआर तैयार की जा रही है। यह केंद्रीय विद्यालय प्रदेश के दूर दराज इलाकों में हैं, जहां इनके खुलने से शिक्षा का स्तर और बेहतर हो पाएगा। केंद्र सरकार जम्मू कश्मीर में शिक्षा को लेकर बेहद गंभीरता से कदम उठा रही है। इसके अलावा भी कई जगह जिला प्रशासन की ओर से प्रस्तावित केंद्रीय विद्यालयों को लेकर दस्तावेजी प्रक्रिया की जा रही है।
डॉ. डी मंजूनाथ, डिप्टी कमिश्नर,
केंद्रीय विद्यालय संगठन, जम्मू रीजन