साल 2010 में भागथली से पुलिस ने दो आरोपियों को 1500 नशीले कैप्सूल के साथ किया था गिरफ्तार
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण पंडोह ने 15 साल पुराने एनडीपीएस मामले में आरोपी को साक्ष्यों के अभाव बरी करने का फैसला सुनाया है। आदेश के अनुसार अदालत ने कहा कि आरोपियों से बरामद नशीले पदार्थ को मालखाना में सुरक्षित रखने और एफएसएल भेजने की प्रक्रिया स्पष्ट नहीं है और न ही अभियोजन पक्ष मालखाना रजिस्टर को कोर्ट में प्रस्तुत किया गया।
इसके अलावा अभियोजन पक्ष यह भी साबित नहीं कर पाया कि बरामद माल से छेड़छाड़ नहीं हुई है। लिहाजा कोर्ट ने पुलिस को प्रक्रिया का पालन न करने पर आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी करने का फैसला सुनाया है। कोर्ट में पुलिस के दायर चालान के अनुसार एनडीपीएस का मामला 15 नवंबर 2010 का शहर से सटे भागथली इलाके का है। पुलिस टीम ने नाका चेकिंग के दौरान दो व्यक्तियों को रोककर तलाशी ली थी। इसमें आरोपी इकबाल सिंह निवासी बरनोटी के पास से 800 नशीले कैप्सूल जबकि मंगा राम निवासी वार्ड 11 कठुआ से पुलिस ने 700 कैप्सूल बरामद किए थे। इसके बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस अधिनियम की धारा 8/21/22 के तहत मामला दर्ज कर चालान को 28 नवंबर 2011 को कोर्ट में प्रस्तुत किया था। आरोपियों के खिलाफ आरोप 30 जनवरी 2012 को तय किए गए थे। इसमें आरोपियों ने खुद को बेकसूर बताया और मुकद्दमा चलाए जाने का कोर्ट से आग्रह किया गया।
बता दें कि आरोपी मंगा राम की वर्ष 2019 में मौत हो जाती है और कोर्ट ने उसके खिलाफ कार्रवाई को समाप्त कर दिया था। कोर्ट में सभी आठ गवाहों ने आरोपियों से बरामदगी की पुष्टि की लेकिन गवाहों के बयानों में कई विरोधाभास सामने आए। इसके अलावा कोर्ट ने पुलिस के मौके पर सीएफएसएल फॉर्म नहीं भरने, स्वतंत्र गवाहों को शामिल न करने और बरामद माल की सुरक्षित कस्टडी पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि जब तक बरामद माल की सुरक्षित कस्टडी साबित न हो तब तक आरोपी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। इसके बाद अदालत ने आरोपी इकबाल सिंह को संदेह का लाभ देते हुए बरी करने का फैसला सुनाया गया।