अदालत ने अपराध स्वीकारोक्ति आवेदन के बाद सुनाई
कठुआ। विशेष मोबाइल मजिस्ट्रेट ने लापरवाही और तेज गति से वाहन चलाने के मामले में दोषी को एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। कोर्ट ने आरोपी को यह सजा अपराध को स्वीकार करने के बाद सुनाई है।
कोर्ट में दायर स्वीकारोक्ति आवेदन के अनुसार दुर्घटना का मामला वर्ष 2023 का है। इसमें आरोपी परवीन कुमार निवासी मिलाजुमाला अवर्न जिला मऊ उत्तर प्रदेश पर आरोप था कि दुर्घटना के दिन उसने वाहन को तेज गति और लापरवाही से चलाते हुए एक नाबालिग को टक्कर मार दी। इसमें पीड़ित गंभीर रूप से घायल हो गया था। इसके बाद कठुआ पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 279, 337 और 338 के तहत मामला दर्ज कर चालान को कोर्ट में 31 अगस्त 2024 को प्रस्तुत किया।
बीते 29 दिसंबर को आरोपी और नाबालिग के पिता ने संयुक्त आवेदन देकर कोर्ट को बताया कि आईपीसी की धारा 337 और 338 के तहत दर्ज अपराध को समझौते के आधार पर समाप्त करने की मांग की। दोनों पक्षों ने अदालत को बताया कि वे आपसी समझौते पर पहुंच चुके हैं और घायल पक्षकार आरोपी के खिलाफ मुकद्दमा आगे नहीं बढ़ाना चाहता है। अदालत ने इस आवेदन को स्वीकार करते हुए आरोपी को इन धाराओं से बरी कर दिया। इसके पश्चात मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी अधिवक्ता के साथ अदालत में पेश हुआ। आरोपी ने स्वयं अदालत में आईपीसी की धारा 279 के तहत अपने अपराध स्वीकार करने की इच्छा जताई।
न्यायालय ने उसे पर्याप्त समय दिया और यह समझाया कि वह इस बयान के लिए बाध्य नहीं है और उसकी ओर से दिया बयान उसके खिलाफ पढ़ा जा सकता है। आरोपी अपने बयान पर अड़ा रहा और उसने बयान दर्ज कर अपराध को स्वीकार कर लिया। इसके बाद अदालत ने उसे दोषी करार देते हुए एक हजार जुर्माने की सजा सुनाई जिसे उसने तुरंत अदा कर दिया। अदालत ने आदेश दिया कि जब्त किए गए दस्तावेज या वाहन को विधिवत रसीद के साथ वास्तविक हकदार को वापस किया जाए।