कठुआ। जिला अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने सामूहिक दुष्कर्म और अपहरण के एक मामले में पांच आरोपियों में से मुख्य आरोपी को 15 दिनों की अंतरिम जमानत देने का आदेश दिया है।
आदेश में आरोपी को अंतरिम जमानत के लिए 1 लाख के जमानत बांड के साथ समान राशि का व्यक्तिगत बांड संबंधित जेल प्राधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है। इसके अलावा आरोपी को बिना किसी चूक के आवश्यकता पड़ने पर जांच अधिकारी के समक्ष उपलब्ध रहने को कहा गया है। यही भी निर्देश दिए गए हैं कि आरोपी इस अवधि में साक्ष्य को किसी भी तरह से प्रभावित और जमानत का उल्लंघन नहीं करेगा।
पीड़िता के पिता की ओर से मामले में शिकायत एक सितंबर को कठुआ पुलिस थाने में दर्ज करवाई गई थी। इसमें हनीफ निवासी जटियाल मलेरकोटला पंजाब, जुम्मा पुत्र रहीमी निवासी हरमोया होशियारपुर, बशीर पुत्र मूसा निवासी गिद्दड़पिंडी गुरदासपुर, लियाकत अली पुत्र इशान दीन निवासी नकोदर जालंधर और सादिक पुत्र गोम्मा निवासी मंडमियानी कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) को आरोपी बताया गया।
यह भी शिकायत की गई कि आरोपी उसे अपनी बेटी की शादी हनीफ से करने के लिए धमकाते रहे। पीड़िता के पिता ने बताया कि वो अपनी बेटी और परिवार के साथ लुधियाना में रह रहे थे। आरोपियों की धमकियों के बाद उसने अपनी बेटी को अपने चचेरे भाई के घर कठुआ के भागथली भेज दिया। शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि 27 अगस्त 2024 को जब उसकी बेटी बुखार से पीड़ित थी और वह अपने चाचा के साथ के साथ डाॅक्टर को दिखाने जा रही थी। तो आरोपियों ने पीड़िता को थागथली के पास से जबरन रोककर अपहरण कर लिया। इसके बाद पुलिस थाना कठुआ में 1 सितंबर 2024 को मामला दर्ज करवाया गया। पुलिस ने एफआईआर नंबर 274/2024 के तहत बीएनएस की धारा 87/49/70 (1) के तहत मामला कर सभी आरोपियों को 13 अक्तूबर को गिरफ्तार किया।
मामले के मुख्य आरोपी हनीफ निवासी मलेरकोटला पंजाब की जमानत के लिए जिला अतिरिक्त न्यायाधीश की अदालत में 17 अक्तूबर को वकील ने जमानत अर्जी लगाई। जिसकी सुनवाई करते हुए अतिरिक्त न्यायाधीश प्रवीण पंडोह ने दो पक्षों को सुनने के बाद आगामी 20 नवंबर को आरोपी को अंतरिम जमानत का आदेश दिया है। आदेश में यह भी कहा गया है कि आवेदक जांच एजेंसी के साथ जांच को सुचारू रूप से पूरा करने में सहयोग करेगा तथा न्यायालय की पूर्व अनुमति के बिना जम्मू-कश्मीर प्रदेश के क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र को नहीं छोड़ेगा। किसी भी शर्त के उल्लंघन की स्थिति में अभियोजन पक्ष को कानून के अनुसार जमानत रद्द करने की मांग करने की स्वतंत्रता होगी।