अब भागथली औद्योगिक क्षेत्र के निर्माण के लिए अधिग्रहीत की गई भूमि में किया शामिल
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। जराई गांव का खेल मैदान आज औद्योगिक विकास की भेंट चढ़ चुका है। रावी दरिया के किनारे यह ऐतिहासिक मैदान 72 कनाल क्षेत्र में फैला था। इसे अब भागथली औद्योगिक क्षेत्र के निर्माण के लिए अधिग्रहीत की गई भूमि में शामिल कर लिया है। तीन वर्ष पूर्व हुए इस अधिग्रहण के बाद मैदान की जगह अब औद्योगिक इकाइयों की इमारतें खड़ी हो रही हैं और गांव के युवाओं के पास खेलने के लिए एक इंच भी जगह नहीं बची है।
स्थानीय ध्रुव सिंह मेमोरियल स्पोर्ट्स क्लब के सदस्यों ने बताया कि यह मैदान न केवल जराई गांव बल्कि आसपास के गांवों के युवाओं के लिए भी खेल गतिविधियों का केंद्र था। सुबह-शाम क्रिकेट, कबड्डी, फुटबॉल से गुलजार रहता था और छुट्टी के दिनों में तो बच्चों और युवाओं की चहल-पहल से जीवंत हो उठता था। औद्योगिक विकास के नाम पर अब न केवल मैदान छिन गया है बल्कि इन इकाइयों में रोजगार भी नहीं मिला। स्थानीय लोगों का कहना है कि औद्योगिक विकास जरूरी है लेकिन यदि इसके चलते सामाजिक और मानसिक विकास बाधित हो रहा है जो चिंता का विषय है। जराई गांव के युवाओं को खेल और रोजगार दोनों से वंचित करना प्रशासनिक दृष्टिकोण की गंभीर चूक है। उन्होंने कहा कि जराई गांव के इस मैदान की कहानी कई ग्रामीण क्षेत्रों की सच्चाई बनती जा रही है। यहां विकास की दौड़ में युवाओं की जरूरतें पीछे छूट रही हैं। अब जरूरत है कि प्रशासन इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करे और युवाओं को खेल और रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाए।
प्रशासन युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए खेलों की ओर प्रेरित करता है लेकिन जराई गांव में अब खेलों के लिए कोई स्थान ही नहीं बचा है। उन्होंने चिंता जताई कि गांव में नशे की प्रवृत्ति एक कल्चर का रूप लेती जा रही है। युवाओं के पास न तो खेलने का मैदान है और न ही रोजगार के अवसर।
- शब्बीर अहमद, स्थानीय युवा
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पंचायत फंड से चार लाख रुपये खर्च कर इस चार दशक पुराने मैदान का समतलीकरण करवाया था। इसके बाद खेलो इंडिया योजना के तहत मैदान को और विकसित करने की योजना भी बनी थी। भूमि अधिग्रहण के बाद न केवल पंचायत का निवेश व्यर्थ गया बल्कि युवाओं के सपनों का मैदान भी छिन गया।
आराधना अंदोत्रा, पूर्व सरपंच
- कोट
औद्योगिक क्षेत्र के विकास के लिए ली गई 300 कनाल भूमि पूरी तरह से रकबा सरकार है। अगर ऐसे स्थान पर गांव के लोगों ने कोई मैदान बनाया था तो उसके बारे में जानकारी नहीं है।
- विक्रम कुमार, तहसीलदार कठुआ