कठुआ (बोबिया से)। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बाॅर्डर पर कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में बीएसएफ का शौर्य और वीरता छह दशक के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय बना। उस कठिन घड़ी में भी बीएसएफ जवानों ने सीमा प्रहरी के भाव को हमेशा के लिए उज्ज्वल और बुलंद रखा।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कठुआ जिले की अंतरराष्ट्रीय सीमा का दौरा किया। हीरानगर सेक्टर पर वे गुरनाम और बोबिया अग्रिम चौकियों पर पहुंचे। उन्होंने बोबिया चौकी पर सीमा ग्रिड की सुरक्षा को लेकर नवस्थापित फाइबर डिटेक्शन और रेंजिंग, एफआईडीएआर सिस्टम का उद्घाटन किया। साथ ही सीमा सुरक्षा बल की तरफ से सीमा पार घुसपैठ रोकने के लिए तैनात उपकरणों एवं गैजेट्स का निरीक्षण भी किया। उन्होंने बार्डर आउट पोस्ट से पाकिस्तानी चौकियां भी देखीं। लगभग दो घंटे गृहमंत्री भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा की अग्रिम चौकियों पर मौजूद रहे।
शाह ने कहा कि जम्मू कश्मीर फ्रंटियर ने पाकिस्तान की 118 पोस्ट और तीन आतंकी लॉन्च पैड ध्वस्त किए। इसके लिए सब इंस्पेक्टर मोहम्मद इम्तियाज अहमद और सिपाही दीपक को उनके सर्वोच्च बलिदान के लिए वीर चक्र से भी सम्मानित किया गया। कहा कि 16 गैलेंट्री मेडल और प्रशंसा पत्र बीएसएफ को मिलना भी गर्व की बात है।
शाह ने कहा कि सीमा पर जब भी वे जाते हैं तो बीएसएफ जवानों से कर्तव्य बोध और कर्तव्य निर्वहन सीख कर लौटते हैं। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर कार्यक्रम के संबंध में जब वे पोस्ट करेंगे तो उसके कमेंट गृह मंत्री के लिए नहीं हमारे सीमा प्रहरियों के लिए होते हैं। इनकी बहादुरी और त्याग तपस्या बहुत बड़ी बात है। उन्होंने कहा कि बीएसएफ ने अपने छह दशक में एक महावीर चक्र, दो कीर्ति चक्र, 15 वीर चक्र, 13 शौर्य चक्र और अनेक प्रशासनिक सम्मान प्राप्त किए हैं। देश की सीमाओं पर जब-जब भी अतिक्रमण का भय आया, घुसपैठ का भय आया। बीएसएफ एक अभेद दीवार बनकर डटी रही। देश को सुरक्षित करने का काम किया है
बीएसएफ ने हर जगह अपनी वीरता का परचम लहराया
गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि बीएसएफ जवान सीमा पर तैनात हैं लेकिन देश के अंदरूनी हिस्सों में भी चाहे मणिपुर का दुर्गम क्षेत्र हो, नॉर्थ ईस्ट के क्षेत्र हों या विशेष कर उड़ीसा और छत्तीसगढ़ के लाल आतंक से पीड़ित माओवादी क्षेत्र हों। बीएसएफ को जहां-जहां लगाया वीरता के परचम वहां पर भी गाढ़े हैं। उन्होंने कहा कि जब पंजाब के मुख्यमंत्री मिलने आए थे तब उन्होंने कहा था कि बीएसएफ न होती तो हम सबकी बहुत दिक्कतें बढ़ जातीं। बाढ़ में बीएसएफ ने पंजाब के नागरिकों की बहुत सेवा और मदद की।
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60 साल में बदल गई चुनौतियां, अब माडर्न तकनीक से होगी सीमाओं की निगरानी
आईबी पर जवानों को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृहमंत्री ने सीमा सुरक्षा और जवानों को तकनीक से लैस करने की बात कही। उन्होंने कहा कि 60 साल पहले की सीमा और आज की सीमा की चुनौतियां बदल चुकी हैं। कहा कि जवानों के शौर्य, तत्परता और ड्यूटी पर लगे रहने की लगन जरूरी है।
उन्होंने कहा कि बीएसएफ के 61वें स्थापना वर्ष में उन्होंने कहा था कि बीएसएफ के 61 वर्ष बीएसएफ के मॉडर्नाइजेशन, जवान और उनके परिवार जनों के कल्याण का वर्ष बनाया जाएगा। गृह मंत्रालय में एक टीम दोनों चीजों पर काम कर रही है। बीएसएफ के जवान के कल्याण के लिए भी केंद्र सरकार एक विशिष्ट योजना लेकर आएगी। पूरी बॉर्डर सिक्योरिटी का जो काम है उसको तकनीक के आधार पर मॉडर्नाइज करते हुए जवानों की मदद की जाएगी। इसके लिए केंद्र सरकार बहुत बड़ी राशि खर्च करने वाली है। उन्होंने आशा जताई कि बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रयुक्त उपकरण बीएसएफ जवानों को ड्यूटी निभाने में बहुत मददगार साबित होंगे। उन्होंने बीएसएफ जवानों को शुभकामनाएं दीं और कहा कि पूरा देश आपके कर्तव्य निर्वहन के भाव के कारण ही चैन की नींद सो रहा है। और सुरक्षित महसूस कर रहा है। 60 साल में बीएसएफ के जितने भी जवानों ने वीरगति प्राप्त की है उन सभी को उन्होंने भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उनके साथ जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन और निदेशक आईबी तपन डेका मौजूद रहे।