जीएमसी कठुआ में पेरिडोनियल डायलिसिस करते हुए विशेषज्ञसंवाद
कठुआ। बीते साल जिले के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान में शुरू हुई पेरिटोनियल डायलिसिस की सुविधा का मरीजों को लाभ मिलना शुरू हो गया है। जीएमसी कठुआ में पहली बार मात्र तीन दिन के नवजात शिशु पर पेरिटोनियल डायलिसिस सफलतापूर्वक किया गया है। संस्थान ने इसे नवजात शिशु चिकित्सा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है।
इस बारे में जीएमसी कठुआ के प्रधानाचार्य डॉ. सुरिंदर कुमार अत्री ने बताया कि नवजात शिशु को गंभीर अवस्था में भर्ती किया गया था जहां डॉक्टरों की ओर से की गई जांच में पाया गया कि उसमें स्टेज-3 एक्यूट किडनी इंजरी (एकेआई) के साथ गंभीर हाइपरकलेमिया और हाइपरयूरिसेमिया जैसी जानलेवा इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन की स्थिति थी। इतनी कम उम्र और उच्च जोखिम वाले इस मामले में समय पर निर्णय, विशेषज्ञता और सतत निगरानी की आवश्यकता थी। इसके बाद जीवनरक्षक पेरिटोनियल डायलिसिस की प्रक्रिया बाल रोग विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर एवं पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. आकाश कुमार की ओर से की गई। इस उपचार के दौरान डॉक्टरों की टीम डॉ. हे्नुका, डॉ. दीपशिखा, डॉ. शारदा और डॉ. निम्फी सहित इंटर्न्स ने तीन दिनों तक निरंतर निगरानी और अथक प्रयास किए। उनकी टीम भावना और समर्पण ने इस कठिन परिस्थिति में नवजात को जीवनदान दिया। प्रधानाचार्य ने कहा कि यह उपलब्धि न केवल जीएमसी कठुआ की बढ़ती क्षमताओं को दर्शाती है बल्कि संस्थान की उन्नत स्तर की बाल नेफ्रोलॉजी देखभाल प्रदान करने की प्रतिबद्धता को भी मजबूत करती है।