कठुआ। तीन दशक से भी पुराने कठुआ में आकाशवाणी के मुरीद सिर्फ कठुआ ही नहीं बल्कि पंजाब, हिमाचल और जम्मू संभाग के कई जिलों के लोग हैं। तीन दशक में रेडियो का स्वरूप तो बदला ही है, इसका ट्रेंड भी बदला है। डिजीटल युग में डिजीटल हुए रेडियो की बात करें तो आकाशवाणी ने आज भी अपने सादेपन और सरलता से लोगों का दिल जीता हुआ है। कुछ लोगों का यह भी मानना है कि तेजी के इस युग में अब निजी रेडियो श्रोताओं की पसंद बन रहे हैं लेकिन ग्रामीण इलाकों में आज भी विविध भारती से लेकर आकाशवाणी के विभिन्न प्रसारणों को लोग बड़े ही चाव से और मन लगाकर सुनते हैं।
कठुआ के रेडियो स्टेशन का सफर लगभग 36 साल का हो गया है। यह सूचना, शिक्षा एवं मनोरंजन के साथ लोगों को जागरूक करने के अन्य कार्यक्रमों से निरंतर सेवा दे रहा है। डिजिटल दौर में भी रेडियो के श्रोताओं की संख्या बढ़ी है। आज भी रेडियो कठुआ से प्रसारित किए जाने वाले कार्यक्रमों में किसान बाणी खास तौर से किसान तबके की पहली पसंद है। किसानों को विशेषज्ञों की राय, उनके खेतों में काम करते समय या फिर घर में चाय पीते समय ही मिल जाती है। इसके अलावा वैज्ञानिकों से नए उपकरणों, बीजों, माैसम अनुरूप फसलों पर प्रभाव और बेहतर कृषि के टिप्स भी हासिल करते हैं। कला संस्कृति के कार्यक्रम लोगों को अपनी विरासत से जोड़े रखने का काम कर रहे हैं।
एफएम 102.2 मेगा हर्ट्ज पर सुने जाने वाले रेडियो में इस साल कुछ और नए कार्यक्रम भी शामिल करने की तैयारी की गई है। इनमें लोगों की समस्याओं का समाधान करने के लिए रेडिया एक सेतु के रूप में काम करेगा। बच्चों के लिए बाल जगत, महिलाओं के लिए घर परिवार, युवाओं के लिए युवा मंच, खेल पत्रिका भी आकाशवाणी कठुआ से प्रसारित किए जाते हैं।
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स्टाफ की कमी और नए ट्रांसमीटर की जरूरत
1991 में कठुआ मे स्थापित आकाशवाणी को लगभग 34 वर्ष बाद स्टाफ की भारी कमी से जूझना पड़ रहा है। कार्यक्रमों को लेकर जहां अधिकारियों की कमी है वहीं तकनीकी स्टाफ को लेकर भी जरूरत समय-समय पर सामने आती रही है। तीन दशक पुराना ट्रांसमीटर भी अब समय से पिछड़ चुका है। दस किलोवाट की अधिकतम क्षमता वाला यह ट्रांसमीटर अब अधिकतम छह किलोवाट तक ही चलाया जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक पुराने ढर्रे पर चल रहे इस केंद्र से होने वाले प्रसारण मोनो में किए जाते हैं। जबकि देश के अधिकतर रेडियो आज के समय में स्टीरियो आवाज को अपना श्रोताओं को और भी साफ सुथरी और धमाकेदार आवाज के साथ अपने कार्यक्रम पेश करते हैं।
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कोट
आकाशवाणी के कठुआ केंद्र को 34 साल के लगभग हो गए हैं। इस दौरान इसने श्रोताओं के मनोरंजन से लेकर सरकार और जनता के बीच सेतु का काम किया है। इस साल भी श्रोताओं को बांधे रखने के लिए कई नए कार्यक्रमों को शुरू करने की तैयारी है। लोगों की समस्याओं का समाधान करने के लिए रेडियो सेतु का काम कर रहा है। ऐसे में अधिकारियों को स्टूडियो में लाकर लोगों की समस्याओं पर आधारित लाइव या रिकार्ड कार्यक्रम और लोगों के बीच अधिकारियों के साथ जाकर कार्यक्रम करने पर भी विचार चल रहा है।
-राकेश कुमार सत्थु, कार्यक्रम प्रमुख, आकाशवाणी कठुआ