संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। बसोहली उपमंडल के सननघाट स्थित शिव मंदिर में चल रही श्री शिव महापुराण कथा के चौथे दिन कथाव्यास राम दास अनुरागी ने भक्तों को कुबेर प्रसंग सुनाया। कथा के दौरान उन्होंने बताया कि कुबेर पूर्व जन्म में गुणनिधि नामक ब्राह्मण पुत्र थे, जो चोरी और जुआ खेलने में लिप्त रहते थे। एक बार शिवरात्रि की रात चोरी करने मंदिर पहुंचे, लेकिन अनजाने में दीपक जलाकर शिव की पूजा कर दी। इसी अनजाने पुण्य से उन्हें महादेव की असीम कृपा प्राप्त हुई। बाद में कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें धनपति का पद, अलकापुरी नगरी और धन की रक्षा का कार्यभार सौंपा। इसी कारण वे शिवजी के परम भक्त और मित्र के रूप में प्रसिद्ध हुए।
कथाव्यास ने आगे बताया कि कुबेर रावण के भाई माने जाते हैं, लेकिन वे शिव के अनन्य भक्त रहे और उन्होंने रावण को धर्म मार्ग पर चलने की सलाह भी दी थी। वहीं, पार्वती जी को कामुक दृष्टि से देखने पर उनकी एक आंख नष्ट हो गई थी, जिसके बाद उन्होंने पश्चाताप किया और शिवजी ने उन्हें एकाक्षीपिंगल के रूप में नई पहचान दी। कथाव्यास ने भक्तों को समझाया कि कुबेर का जीवन यह दर्शाता है कि अनजाने में की गई शिव भक्ति भी जीवन को बदल सकती है। उन्होंने कहा कि आज के समय में भी हमें अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए धर्म मार्ग पर चलना चाहिए और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभानी चाहिए।