कठुआ। पांच दिनों से रंजीत सागर झील में चल रही क्रैश हुए हेलिकाप्टर और उसमें सवार दो अधिकारियों की तलाश फिलहाल किसी भी नतीजे तक नहीं पहुंच पाई है। ऐसे में पनडुब्बी के बाद अब रंजीत सागर झील में सोनार तकनीक का इस्तेमाल किए जाने की योजना है।
सोनार तकनीक का इस्तेमाल जल की सतह पर किसी धातुनुमा वस्तु की तलाश या संपर्क साधने के लिए किया जाता है। हेलिकाप्टर क्रैश के बाद उसकी सही लोकेशन तलाशने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसमें सतह पर चार से पांच फुट तक जमा सिल्ट बड़ा कारण माना जा रहा है।
शनिवार को भी सर्च आपरेशन दिन भी जारी रहा है। झील के निचले हिस्से में सिल्ट होने और पानी के उथल पुथल से टीमों को गहराई में उतरना संभव नहीं हो पा रहा है। विजिबिलिटी काफी कम है, जिसके चलते पनडुब्बी भी काम नहीं आ पाई है। गोता लगाने वाली स्पेशल फोर्सेज पिछले लगातार पांच दिनों से अभियान में जुटी हैं। ऐसे में सोनार तकनीक से हेलिकाप्टर के टूटे हुए हिस्से की तलाश की जाएगी।
उम्मीद है कि इसी हिस्से में दुर्घटनाग्रस्त हेलिकाप्टर पर चला रहे पॉयलट और को पायलट भी फंसे हो सकते हैं। बीते मंगलवार को हुए हादसे के बाद से ही इलाके को सेना ने अपने कब्जे में ले लिया है। झील के विभिन्न छोर से निगरानी रखी जा रही है। पुरथू इलाके में सेना बाकायदा कैंपिंग कर झील की सतह और भीतर चलाए जा रहे आपरेशन पर नजर रखे हुए है। क्षेत्र के तीन सौ मीटर के दायरे में किसी को भी जाने की अनुमति नहीं है।