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चार हाईवे विलेज जल्द खोले जाएंगेः डॉ. जितेंद्र सिंह

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कठुआ जिला सचिवालय में दिशा की बैठक करते केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ जितेंद्र सिंह। संवाद - फोटो : KATHUA
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कठुआ। केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ जितेंद्र सिंह शनिवार को कठुआ दौरे पर रहे। इस दौरान उन्होंने जिले में दिशा की बैठक की जिसमें उन्होंने विभिन्न केंद्र प्रायोजित योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। बताया कि चार हाईवे विलेज जल्द तरफ मंझली, तरफ भजवाल, गूडा बेलदारां और गूडा मुंडेयां और आसपास खुलने जा रहे हैं। इसके साथ ही लखनपुर को भी हाईवे प्राधिकरण बेहतर विकसित करने जा रहा है। बैठक के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि दिशा बैठक का उद्देश्य कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं की पहचान करना है ताकि प्रभावी समाधान निकाला जा सके। उन्होंने कहा कि कल्याणकारी योजनाओं का उद्देश्य न केवल लाभों का प्रसार करना है, बल्कि ऐसे लाभ वास्तविक लाभार्थियों तक समयबद्ध तरीके से पहुंचे यह सुनिश्चित करना भी है। उन्होंने बेहतर परिणामों के लिए योजनाओं के सुचारु क्रियान्वयन में पंचायती राज संस्थाओं की भागीदारी पर भी बल दिया। वांछित परिणामों के लिए पंचायती राज संस्थाओं और जिला प्रशासन से मिलकर काम करने का आह्वान किया।
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केंद्रीय मंत्री ने पीडब्ल्यूडी, पीडीडी, जल शक्ति विभाग, कृषि, बागवानी, शिक्षा, समाज कल्याण, श्रम विभाग, शहरी विकास विभाग की ओर से कार्यान्वित विभिन्न योजनाओं के संबंध में भौतिक और वित्तीय उपलब्धियों की व्यापक समीक्षा की।
डॉ. सिंह ने बताया कि कठुआ जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग और उसके आसपास 04 नए राजमार्ग गांव बन रहे हैं। । उन्होंने यह भी खुलासा किया कि नेशनल हाईवे प्राधिकरण जम्मू कश्मीर के प्रवेशद्वार के आसपास के क्षेत्र को चिकित्सा, मनोरंजन और अन्य सुविधाओं के साथ विकसित कर रहा है, जो रोजगार के रास्ते खोलने और सौंदर्यीकरण का काम भी करेंगे। उन्होंने उज्ज, शाहपुर कंडी बैराज, बायोटेक पार्क जैसी चल रही मेगा परियोजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की और इन परियोजनाओं को जल्द पूरा करने का आह्वान किया।
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बैठक की शुरूआत में जिला विकास आयुक्त कठुआ राहुल यादव ने विभिन्न केन्द्र प्रायोजित योजनाओं की उपलब्धियों एवं प्रगति के बारे में बताया। साथ ही जिले में विभिन्न विभागों और अन्य एजेंसियों द्वारा क्रियान्वित की जा रही विभिन्न विकास परियोजनाओं की स्थिति के बारे में जानकारी दी गई। विभिन्न प्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए बंदरों की समस्या के मुद्दे के बारे में केंद्रीय मंत्री ने सुझाव दिया कि आईआईआईएम, स्कॉस्ट जम्मू की विशेषज्ञता का उपयोग समस्या के वैज्ञानिक समाधान के लिए किया जा सकता है। ताकि केवल वही फसलें बोई जा सकें जिन्हें बंदर नुकसान न पहुंचाएं। डॉ. सिंह ने बांस मिशन के तहत बांस की फसल लगाने पर भी जोर दिया ।
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