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नया प्रयोग: कठुआ में अरंडी की फसल की प्रायोगिक खेती शुरू, कंडी क्षेत्र को मिलेगा लाभ

Sun, 07 Aug 2022 09:29 PM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, कठुआ

सार

लोगेट गांव से अरंडी की फसल की बुवाई का काम शुरू करवाया गया है। बंदरों से प्रभावित रहने वाले इस क्षेत्र में किसानों के लिए यह अच्छी आय का स्रोत बनेगा।
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castor oil - फोटो : pixabay
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विस्तार
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कठुआ जिला के कंडी क्षेत्र में बंदरों के आतंक के चलते प्रभावित हो रही कृषि को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिला कृषि विभाग ने पहल करते हुए क्षेत्र में अरंडी की फसल बुवाई का काम शुरू करवाया है। यह खेती प्रायोगिक रूप से की जा रही है। जम्मू कश्मीर में पहली बार व्यवसायिक रूप से की जाने वाली खेती का शुभारंभ डीसी राहुल पांडेय ने जिला के मुख्य कृषि अधिकारी संजीव राय, जिला कृषि अधिकारी राजू महाजन स्थानीय गणमान्य नागरिकों के साथ किया।
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जिला कृषि विभाग की पहल की सराहना करते हुए डीसी राहुल पांडेय ने कहा कि भारत सरकार का प्रयास किसानों की आय को दोगुना करने का है, जिसके तहत तरह-तरह के प्रयोगों को आजमाया जा रहा है। इसी के तहत लोगेट गांव से अरंडी की फसल की बुवाई का काम शुरू करवाया गया है। बंदरों से प्रभावित रहने वाले इस क्षेत्र में किसानों के लिए यह अच्छी आय का स्रोत बनेगा। धीरे-धीरे अरंडी की खेती को विस्तार भी दिया जाएगा।

विशेषज्ञों ने बताया कि अरंडी की खेती खरीफ के मौसम में औषधीय तेल के रूप में की जाती है। इसका पौधा झाड़ी के रूप में विकास करता है। इसकी खेती व्यापारिक तौर पर अधिक लाभ कमाने के लिए की जाती है। अरंडी का बीज लंबे समय तक पकता रहता है, जिसमें 40 से 60 प्रतिशत तेल की मात्रा पायी जाती है। इसके तेल के इस्तेमाल से कपड़ा, साबुन, प्लास्टिक, कपड़ा रंगाई, हाइड्रोलिक ब्रेक तेल, वार्निश और चमड़े आदि चीजों को बनाया जाता है। इसके अलावा इस तेल को पाचन, पेट दर्द, और बच्चों की मालिश के लिए भी उपयोग करते हैं। तेल निकालते समय निकलने वाली खली को जैविक खाद के रूप में इस्तेमाल करते है। बाजार में इसकी प्रति क्विंटल एमएसपी सात हजार रुपये है, जिससे किसान अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।
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मक्की की खेती 50 फीसदी तक सिमट चुकी
जिले में एक समय पर 21 हजार हेक्टेयर में होने वाली मक्की की खेती 50 फीसदी इलाके में सिमट चुकी है। बंदरों के आतंक से जहां किसान पिछले कई दशक से परेशान थे वहीं दो साल से फसल पर आर्मी फाल वर्म का हमला हुआ जिससे किसानों की रही सही हिम्मत भी टूटती जा रही है। ऐसे में कृषि विभाग ने खास तौर पर कंडी में अरंडी की खेती को आजमाने की योजना बनाई है।

मुख्य कृषि अधिकारी संजीव राय ने कहा कि विभाग द्वारा किसानों की आय को बनाए रखने के उद्देश्य से इस प्रयोग को आजमाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गांव के प्रगतिवादी किसान अशोक कुमार 2 कनाल भूमि पर प्रायोगिक तौर पर अरंडी लगा रहे हैं। लेकिन आने वाले दिनों में जिले के करीब एक एकड़ क्षेत्र में अलग-अलग स्थानों पर इसे लगवाया जाएगा, ताकि किसानों की आय के बेहतर साधन उपलब्ध हो सके।

अरंडी के उत्पादन में भारत पहले स्थान पर
जिला कृषि अधिकारी राजू महाजन ने स्थानीय लोगों को अरंडी की फसल का महत्व बताते हुए कहा कि पूरे विश्व में उत्पादन में भारत पहले नंबर पर है। अरंडी की खेती को व्यवसायिक रूप से यदि किसान अपनाते हैं तो उन्हें काफी अधिक आय होगी। वही इस मौके पर मौजूद लोगेट गांव के सरपंच राजा राम सिंह और सहार पंचायत के सरपंच भोली सिंह जसरोटिया ने भी कृषि विभाग द्वारा अरंडी की फसल के लिए उनके क्षेत्र का चयन करने के लिए आभार जताया और विश्वास दिलाया की किसानों के हित में लिए जाने वाले किसी भी फैसले में विभाग का हर संभव सहयोग करेंगे।
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