भड्डू के राम नाटक क्लब में रामलीला के दौरान सीता जन्म के दृश्य ने दर्शकों को भावुक कर दिया। कलाकारों के प्रभावशाली अभिनय से माहौल भावनात्मक हो गया। दर्शकों ने सीता मइया की जयकार लगाई।
राम नाटक क्लब भड्डू में रामलीला के तीसरे दिन सीता जन्म का मंचन किया गया। कलाकारों के अभिनय ने दर्शकों पर अमिट छाप छोड़ी। प्रसंग को देखकर दर्शक भाव विभोर हो गए।
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लीला का शुभारंभ राजा जनक के राज्य मिथिला में अकाल पड़ने से होता है। राज्य के हालात से चिंतित महाराज जनक ने ऋषियों, मुनियों और विद्वानों से सलाह मांगी। तब सभी ने सलाह दी कि स्वयं हल से भूमि को जोतकर भगवान इंद्र को प्रसन्न करें। राजा जनक ने राज्य से अकाल को समाप्त करने के लिए भूमि को हल से जोतना शुरू किया। इसी दौरान राजा जनक का स्वर्ण कलश से टकरा जाता है। राजा ने स्वर्ण कलश को निकाला जिसमें दिव्य ज्योति लिए नवजात कन्या मिली।
कन्या को राजा जनक ने अपनी पुत्री मान लिया। कन्या कलश में हल लगने की वजह से मिली थी। हल की नोक को सीत कहते हैं। इसलिए महाराज जनक ने कन्या का नाम सीता रखा। सीता जन्म और मिथिला में उल्लास के साथ परदा गिर जाता है। दर्शक सीता मइया की जय का उद्घोष करते हैं। उपमंडल के अलग-अलग कस्बों में भी रामलीला का आयोजन किया गया।